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अयोग्य लोगों को आर्य समाज का अधिकारी क्यों ?

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अयोग्य लोगों को आर्य समाज का अधिकारी क्यों ?
बंगाल में आर्य समाज का प्रचार न होने में दोषी हिन्दी भाषी।।
आर्य समाज की स्थापना 1875,में हुई मुंबई में ।
और 10 साल के बाद 1885 में कोलकाता आर्य समाज की स्थापना हुई।
लेकिन इस समाज में हिन्दी भाषी ही हावी है
तब से लेकर अब तक बंगाल में आर्य समाज केअधिकारी बंगला भाषी को बनने नहीं दिया।
 
माननीय,बीके वर्मन जी के बाद से ही ज्यादा गड़बड़ी हुई है जब की बंगाल सभा यह बंगालियों का ही प्रतिष्ठान है | यह हिन्दी भाषी इस बंगाल में बंगालियों को कोई मर्यादा किसी को कोई अधिकार देना ही नहीं चाहते।
 
इस अग्नि में घी डालने का काम दिल्ली के अधिकारी बनकर फिर रहे लोग ही है ।
जिसमें कल 3 / 7 /2022 का चुनाव को ले सकते हैं ।
 
दिल्ली से बंगाल सभा के चुनाव में जहाज से आने जाने का खर्चा दो लोगों का कितना धन व्याय हुआ ? इसका अंदाजा लगायें काम हो बंगाल में और निर्णय दिल्ली के हाथ में वह किस लिए ?
 
इसपर किसी को चिन्ता नहीं की आखिर आर्यों का धन कहां लग रहा है ? इसका दुरुपयोग क्यों हो रहा है कौन इसके दोषी हैं ?
आज के चुनाव में बाधक बने विनय आर्य दिल्ली सभा के मंत्री जिनके आने का कोई तुक नहीं था । विनय की एक मुर्खता मैं लिख रहा हूँ और कल मैं भरी सभा में इसका विरोध किया |
विनय ने अपने वक्तव्य में क्रांतिकारियों में तीन सरदारों का नाम लिया | मैंने देर न लगाते हुए कहा आपको बंगाल के क्रांतिकारियों का नाम नहीं मालूम ?
क्या मातंगिनी हाजरा, बिनय, बादल दिनेश, और बाघा जतिन का नाम तो आप जानते ही नही |
बंगाल में आकर क्रांतिकारियों का नाम सुनाना कितनी जिहालत है जो बंगाल क्रांतिकारियों की भूमि है | इससे अंदाजा लगायें यह लोग कितने जानकार होंगे | इसे कहते हैं बन्दर को मिल गया हल्दी का गाँठ |
 
और साथ लाए उनको जो गुजरात से आए वाचोनिधि जिन्हे चुनाव का सब भार इनपर दिया गया । वह बंगाल का क्या जानते हैं भला ? जो चुनाव कराये बंगाल की पारिस्थिति के जानकार ही इसे समझ सकते हैं | दिल्ली और गुजरात के लोग क्या समझ सकते भला ?
जब कि वह बंगाल की दशा को कभी जाना ही नहीं । और चुनाव के अधिकारी बनके वह आए जिन्होंने करोड़ों संपत्ति को खुद कब्जा किए बैठे हो । दिल्ली वाले उन्हें साथ लिए घूम रहे ।
कारण दिल्ली के अधिकारी भी उन्हीं घोटाले बाजों में हैं, यह लोग धनवान पर डोरा डालते है।
जैसे यह दोनो ही डॉलर बनियान वाले दीन दयाल जी से नजदीकी रखते हैं ।
यह आर्य समाज के वह भंवरे है, जिनके पास धन है इसी जगह जा कर बैठते है ।
 
इधर दीनदयाल गुप्ता अपने पैसों के बल पे बंगाल आर्य प्रति निधि सभा पर तीन बार काबिज होने में इन्हीं भंवरों का योगदान है ।
 
जो दीनदयाल गुप्ता वैदिक मान्यता के एक अक्षर भी नहीं जानते | दिल्ली के लोगों द्वारा उन्हें बंगाल सभा का प्रधान बनाना कितनी बड़ी भूल है वह भी तीन बार क्यों बंगाल में कोई बंगभाषी नहीं है जो प्रधान बनें ?
बंगाल में बंगला भाषा में प्रचार की जरुरत है जिन्हें बंगला का बी नहीं आता वह प्रधान क्यों बनें ?
 
बंगाल के मूल निवासियों को इस वैदिक विचारधारा से जोड़ा नहीं जा सका आज तक । इसके लिए यह सब लोग दोषी हैं । जो 1885 से लेकर अब तक बंगला भाषा में प्रचार ही नहीं हो पाया |
बंगाल प्रान्त जो बुद्धिजीवियों का प्रांत माना जाता है उन्हें वैदिक विचारों से न जोड़ पाने के लिए यही लोग मात्र दोषी ही नहीं किंतु पाप भी बटोर रहे हैं ।
 
जिस संगठन का जन्म बहुत बाद में हुआ आज इसी बंगाल में उनका प्रचार कैसा हो रहा है ? वह लोग जब प्रचार कर सकते हैं, तो आर्य समाज का प्रचार क्यों नहीं हो सकता?
 
आर्य समाज का प्रचार बंगाल में न हो पाने का कारण जो आप लोगों ने इस लेख में देख लिया।
सवाल यह पैदा होता है कि जब बंगाल में आर्य समाज इतने दिनों से है, किंतु बंगाल के लोग क्यों नहीं जान पाए जिसका कई कारण मैं लिखा।
 
अब सवाल यह उठता है कि बंगाल के चुनाव में दिल्ली किसलिए कूदती ? पहले भी अब भी इसका मूल कारण है पैसा, दीनदयाल पैसा वाला है वह इन लोगों के लिए अपनी तिजोरी खोल देते हैं, तो यह सब पैसों का और पैसे वालों का खेल है ।
 
दिल्ली से लेकर बंगाल ही नहीं किन्तु सम्पूर्ण विश्वभर में इन ठगों ने अपनी पैठ जमा रखी है। वरना जो व्यक्ति कभी दिल्ली में बस चलाता था उस विनय के पास जनकपुरी जैसे इलाके में चार मंजिला मकान कैसे आ गए? जिन्हें अपनी बस का कंडक्टरी करते मैंने खुद देखा है |
और उन्हें ठग बाज ही चाहिए, तो जो वाचोनिधि गुजरात में अरबों की संपत्ति का मालिक कैसे ? जो सामान्य बैंक का एक कर्मचारी, अपनी नौकरी ब्रेक कर के इस आश्रम में लिप्त कैसे हो गए?
 
एक तरफ वेद का उपदेश है जीने के लिए खाओ, खाने के लिए मत जिओ । यह उपदेश इन लोगों ने केवल सुनाया है लोगों को,अपने आचरण में नहीं उतारा ।
इसे कहते हैं पर उपदेश कुशल बहुतेरा । आर्य लोगों यह सब हाथी के दांत हैं।
 
और आर्य समाज में यही लोग हावी है, अच्छे लोगों को यह आने नहीं देते ।
आज जानबूझ कर इसी प्रकार बंगाल का चुनाव को बिगाड़ा । किसी की बात सुनकर राजी नही |अगर लोगों की बात सुनना नहीं था तो जनता क्यों बुलाई गई? जिसमें मैं भी एक था,अपना कार्यक्रम छोड़कर इसमें भाग लिया था की चलो बंगाल के लोग भी वैदिक विचारों से जुड़ सकेंगे यही समझ कर ।
बंगाल प्रान्त में बंगालियों को आर्य समाज की जानकारी यह लोग न दिया,और न देना चाहते है । इससे बंगला भाषी जन आर्य समाज के विचारों से वंचित रह रहे हैं । एक मजेदार बात भी सुना दूँ आप लोगों को, जब दीनदयाल को प्रधानी पद मिल गया, वह कहने लगे मंत्री मैं चुनुँगा, क्योंकी प्रधान और मंत्री का संवंध पति पत्नी का होता है | सभा में यह बात तो एक अपढ़ अनभिज्ञ व्यक्ति ही कह सकता है ?
 
अब इन वाक्य का सुनने और समर्थन करने वाले कितने बेवकुफ़ होंगे इसका भी अंदाजा लगा लेना चाहिए |
 
मैंने अब तक जिन लोगों को जोड़ा उनकी शिकायत यही है कि इतनी पुरानी आर्य समाजी ने अपना दायित्व क्यों नहीं निभाया ? यह है बंगाल में आर्य समाज की दशा।
कल मैंने विनय, और वाचोनिधि फिर बाद में सभा के लोगों को कहा कि दिल्ली से मैं अपनी सदस्यता समाप्त कर बंगाल में सदस्यता लिया, अगर यही आर्य समाज है या इसी का नाम आर्य समाज है तो मैं अपनी सदस्यता निरस्त करवा लूँगा |
 
आर्य समाज में आकर सबसे बड़ा काम तो मेरा हैं 22 हज़ार से ज्यादा लोगों की घर वापसी | 600 से ज्यादा हिन्दू लड़कियों को मुसलमानों के चंगुल से निकालना कई सौ मुस्लिम लड़कियों को वैदिक परिवार में विवाह कराना |
डॉ० जाकिर नाईक का पर्दाफाश सुदर्शन न्यूज़ चेनल में बैठकर करना या उससे भारत छुड़वाना | दिल्ली हाईकोर्ट से सत्यार्थ प्रकाश का वकीलों के साथ खड़ा होकर केस को जितवाना, अपनी टीम बनाकर सत्यार्थ प्रकाश से लेकर वैदिक साहित्य को अपनी ओर से डाक खर्च लगाकर देश विदेशों तक पहुंचाना यह मेरी बनाई टीम द्वारा मुंबई से श्री मगनलाल दीवानी जी के द्वारा हो रहा है |
 
दिल्ली सभा हो या सार्वदेशिक सभा की वैदिक मान्यता के खिलाफ मेरा प्रचार अभियान चलाना इन्हें रास नहीं आया यही कारण है की मुझे कभी इन लोगों ने अपना नहीं समझा और न काम करने का कोई अवसर दिया | आज 39 वर्ष हो गया इसी नवम्बर से 40 वर्ष प्रचार कार्य में मेरा लगने वाला है |
इस प्रकार के बहुत काम मेरे द्वारा किये गये हैं बहुत हैं, मैंने अपनी 6 पुस्तक लिखकर बता दिया है |
मुसलमानों से अब तक 16 डिबेट हो चूका है सुदर्शन न्यूज़ चेनल में बहुत से लगे हैं आप लोग भी मेरे youtube चेनल में देख सकते हैं | vaidikgyan.in में देखा जा सकता है, फेसबुक पेज में भी देख सकते हैं | लेकिन आर्य समाज में मूल्यांकन नहीं है और न यह लोग विद्वानों की कभी कदर करते हैं | इन्हीं लोगों ने हॉलैंड के आर्य महासम्मेलन में भरी सभा में मेरे हाथों से माइक छिना, यह अपमान सहकर भी मैं आर्य समाज के प्रचार के में लगा हूँ |
यह है दशा आर्य समाज के नाश होने का, यहाँ अपुज्यों की पूजा होती है और पूजनीय को तिरस्कृत किया जाता है | आर्य समाज से पहले जन्मे ब्रह्म समाज, जो आज वेंटिलेटर पर है आने वाले समय में कहीं आर्य समाज की दशा ऐसी न हो जाये |
महेन्द्र पाल आर्य 4/7/2022

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