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अल्लाह अपनी कुरान की फ़ज़ीलत नहीं जानते ||

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अल्लाह अपनी कुरान की फ़ज़ीलत नहीं जानते ||
यह प्रमाण इबने कसीर हिन्दी भाष्य जिल्द 6 पेज 433 पारा 29 सूरा 67 मुल्क की शुरुयात | इस सूरा को भी अल्लाह ताला ने उन्ही वाक्य से शुरू किया जैसा की और जगह भी देखा होगा आप लोगों ने | यह आयत कि शुरुयात भी उसी अल्लाह के नाम शुरू किया गया जो निहायत मेहरबान बड़े रहम वाले हैं | इन आयातों से पता लगता है की, इन आयातों का बोलने वाला मेंहरबान और कोई भी नहीं है | जो अल्लाह मेहरबान है और बड़ा भी है उसी अल्लाह के नाम से ही प्रायः सभी सुरा को शुरू करते समय अल्लाह ने यही कहा है | तो यह सूरा 67 मुल्क की फ़ज़ीलत बयांन कर रहे हैं |
देखें कुरानी आयत की कमाल एक आदमी मर गया जो कुरान की 114 सूरतों में से एक सूरा यही 67 मुल्क याद किया और इसे पढता था | उसके मरने के बाद जब कबर में फ़रिश्ते उसे आजाब देने को आये तो यही सूरा जो उस व्यक्ति ने याद किया था यह सूरा ही अल्लाह के पास शिकायत लेकर पहुंच गई |
की ऐ अल्लाह यह बन्दा मुझे रातों रात जाग कर खड़ा खड़ा पढ़ा करता था क्या मैं इस लायेक नहीं की इसके लिए सिफारिश करूं ? अल्लाह ने इस सूरा से कहा अभी तुम गुस्से में हो गुस्सा शांत हुआ तो यही सूरा की सिफ़ारिश से उस आदमी को कबर की आजाब से निजात मिल गया |
मानव कहलाने वालों को इसपर विचार करना चाहिए की कुरान की यह आयत अल्लाह तक पहुंचना और अल्लाह से बातें करना यह सत्य हो सकता है क्या ? अल्लाह के पास यह आयत पहुंची तो पहला सवाल होगा की अल्लाह कहाँ है जहां यह आयत पहुंची ? कुरानी आयत जड़ है अथवा चेतन एक जड़ चीज का उढ़कर अल्लाह के पास जाना लिखा है, यह बातें सच हो सकती है क्या ? अल्लाह कहां बैठे हैं पता नहीं उसी अल्लाह से यह कुरान की आयतें बातें कर रही है क्या यह सन्देह के घेरे में नहीं है यह कुरानी आयत और कुरान का अल्लाह ? न मालूम इस कपोल कल्पित बातोंको लोग अल्लाह की कलाम मानते हैं, ईश्वरीय ज्ञान भी कहते और बताते हैं, क्या इस कुरानी आयातों का ईश्वरीय ज्ञान होना संभव है ? ईश्वरीय ज्ञान किसे कहते हैं उसे बिना जाने ही किसी को ईश्वरीय ज्ञान कह्देना या मान लेना अकलमंदी होगी क्या ? जब की अल्लाह का यह भी कहना है की अल्लाह के पास किसी की भी सुफरिश चलने वाली नहीं है तो फ़िर कुरानी आयातों का सिफारिश अल्लाह से क्यों और कैसा सत्य माना गया यहाँ पर ?
दूसरी बात यह भी गोगी की जिस कुरानी आयातों को अल्लाह ने दिया उसकी फ़ज़ीलत और अहमियत को अल्लाह को भी पता नहीं ? की इन 114 सूरतों को मैंने दी है इसमें एक सुरा हीआकर उसे पढने वाले बन्दे की सिफारिश करें ? जिसे लोग कलामुल्लाह कहते हैं उस में बताई गई गप्प को देखें | महेंद्र पाल आर्य 12 /4/2022

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