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अल्लाह एक जानवर से मानवीय भाषा में बात कराएँगे ||

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अल्लाह एक जानवर को मानवीय भाषा में बात करायेंगे ||
यह प्रमाण इबने कसीर पेज 517,पारा 20,सूरा 27,अन नमल आयात 82,का सन्दर्भ = दाबबतल अरज़ा = जिस जानवर का बयां जिकर है यह लोगों के बिलकुल बिगड़ जाने और दीने हक़ को छोड़ बैठने के वक्त आखिर जमाने में जाहिर होगा –जब के लोगों ने दिने हक़ को बदल दिया होगा –
 
बायाज कहते हैं के यह मक्का शरीफ से निकलेगा बयाज कहते हैं और किसी जगह से ज्जिसकी तफसील अभी आएगी इंशाअल्लाह ताला – वह बोलेगा बातें करेगा और कहेगा के लोगों अल्लाह की आयातों का यकीं नहीं करते थे –
 
इबने ज़रीर इसी को मुख्तार कहते हैं लेकिन इस कौल में नज़र है वल्लाह आयल्म – इबने अब्बास का कौल है के वह उन्हें जख्मी करेगा – एक रवायत में है के वह यह और यह दोनों करेगा – यह कौल बहुत अच्छा है और दोनों बातों में कोई नुकसान नहीं | वल्लाहआयलंम {अल्लाह जाने लिखा}
नोट :- दुनिया वालों को भली प्रकार से इन कुरानी आयत को पढना चाहिए और इसपर विचार करना चाहिए की अल्लाह ने जों बातें इस आयत में बताया वह कहाँ तक सच है ? अथवा सच है या नहीं इसपर विचार करना होगा | किसी जानवर से मानवीय भाषा में बातें करना क्या यह सच हो सकता है ?
 
अगर हाँ तो किस प्रकार, अगर वह इंसानी भाषा में बात करेगा तो उसका नाम जानवर नहीं हो सकता ? जानवरों में और इंसानों में फरक क्या है ? एक का नाम इन्सान और दुसरे का नाम जानवर क्यों पड़ा ? क्या भेद है इन दोनों में अल्लाह को इसका भी ज्ञान नहीं है और न अल्लाह वालों को पता | महेन्द्र पाल आर्य 1/8/21

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