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अल्लाह की कलाम में झूठ को भी सच कहा गया ||

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अल्लाह की कलाम में झूठ को भी सच कहा गया ||
यह प्रमाण इबने कसीर हिन्दी भाष्य पेज 312, पारा 23,सूरा 37,सफ्फत आयात 88,89,90,91,92,93,94,95,96,97,98,का सन्दर्भ =देखें अल्लाह के नबी बीमार नहीं थे, और लोगों से कहा मैं बीमार हूँ यह पहला झूठ बोला {!}| झूठ की अपने हाथों से कुल्हाड़ी से बुतों को तोडा और लोगों से कहा की जो तुम्हारा बड़ा बुत कुल्हाड़ी लिए खड़े हैं बुत उन्हों ने सभी बुतों को तोडा यह दूसरी झूठ {2} | और तीसरा{3} झूठ की जब वह काफिले में जा रहे थे तो एक बादशाह ने रोक लिया उनकी काफिला, इनके साथ इनकी पत्नी सारा बीवी भी थीं,उनके लिएबादशाह ने पूछा यह कौन है तो कहा की यह मेरी बहन है |
और सारा को भी समझादिया की बादशाह अगर पूछे तो यही बताना | यह है अल्लाह के पैगम्बर की झूठ | यह 3 बार की है और इसे सच कहा गया है |
अब यहाँ इन तफसीर कार ने लिखा की यह झूठ नहीं है किसि शरई मकसद से यह झुठ का मसला नहीं है | इसे हक़ की तलाश भी लिखा है अब अल्लाह के नज़र में हक़ यही है की झूठ बोलकर भी उसे इनकार करना शायद अल्लाह ने इसे ही हक़ माना है ? जो झूठ लोकाचार में दिख रही है उसी झूठ को हक़ मानना या बताना कैसा सत्य हो सकता है ?
इसे ही क्लामुल्लाह कहा गया है या कहा जा रहा है दुनिया के लोगों को समझना चाहिए की सत्य क्या है और असत्य क्या है इसे भी जनमानस में नहीं ला सके ? और लोग नाहक ही इसे अल्लाह की कलाम बताकर दुनिया में प्रचार कर रहे हैं | दूसरी बात यह भी है की अल्लाह की कलाम मानव कल्याण का होना चाहिए मानव मात्र का चहुमुखी विकास हो मानव अपना जीवन को कल्याणकारी बना सके इसके लिए अल्लाह का कोई उपदेश नहीं है सिर्फ कौन पैगम्बर आया उनके साथ लोगों ने क्या किया उन लोगों को आग में डाला गया जैसा इन्ही आयातों में है की हजरत इबराहीम को अग्नि में फेंका गया अल्लाह ने उस आग से उन्हें बचा लिया इससे मानवों को क्या मिल रहा है ?

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