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आखिर हम कौन हैं हमारा नाम क्या है ?

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आखिर हम कौन है,हमारा नाम क्या है ?

यह बात हर एक को पता है, मानव कहलाने वाले हर समाज, और हर सम्प्रदाय में किसी भी परिवार में कभी कोई बच्चा जन्म लेता है, तो उसके नाम रखे जाते हैं | कोई मना नही कर सकता की हमारा कोई नाम नहीं है, धरती पर जो कोई कहीं भी आया किसी मुल्क में आया, ज़रूर उसका नाम रखा जाता है | इस बात से इंकार करना न उचित होगा और न संभव है |

 

अब प्रशन होगा की चलो यह तो ठीक है की किसीने भी कहीं भी कोई भी जन्म लिया तो उनके माता पिता ने उस बच्चे का नाम रखा | तो जब दुनिया बनी जिसमे आकाश, वायु, अग्नि, जल, वनस्पतिआदि बनने के बाद जब मनुष्य बनाये, परम पिता परमात्मा ने तो जो हम सबके पिता हैं और माता धरती है –की हम धरती के गर्भ से जन्म लेनेके कारण वह हमारी माता है, तो क्या हमारे माता और पिता ने हमारा नाम नहीं रखा ?

 

जवाब बड़ा ही सीधा है और सरल भी अगर मानव कहलाने वाले समझें तो, हमारे माता और पिता ने मिलकर हमारा नाम रखा है, हम ने उसे जानने का प्रयास नही किया और न तो जानना चाहते हैं |

पिताने हमें धरती पर भेज कर ही हमे उपदेश दिया अहमभूमिम् अदद्याम् आर्यः “यह भूमि मैंने आर्यों को दी, पता लगा की आर्य नाम वेद का है, परमात्मा का दिया नाम है जो नाम हमारे पिता ने हमे दिया है | अगर परमात्मा ने हमारा नाम आर्य रखा है, तो आर्य कौन है ? जवाब मिला आर्य नाम ईश्वरपुत्र: अर्थात जो ईश्वर के पुत्र है उनका नाम आर्य है |

 

बच्चे के पिता कौन है यह जवाब सिर्फ माँ के पास ही है माँ ही बता सकती है की बच्चे के पिता कौन है ? तो यहाँ जब हमारी माँ धरती माँ बता रही है की तुम्हारे पिता परमात्मा ने ही तुम्हारा नाम आर्य रखा है, तुम ईश्वर पुत्र हो तो पिता के दिए नाम को हम लोग स्वीकार किस लिए नहीं कर रहे हैं ?

 

इतना बड़ा प्रमाण हमारे पास होने के बाद भी हमें दुसरे के दिए नाम को अगर हम स्वीकारते हैं तो क्या हमारे पिता ने हमारा नाम नहीं रखा ? यह सवाल आएगा उस वक्त हम क्या जवाब देंगे ?

 

क्या उस परम पिता को हम सब त्वमिव माता चा पिता त्वमिव, त्वमिव बन्धुश्च सखा त्वमिव, त्वमिव विद्या द्रविणं त्वमिव त्वामिव सर्वम मम् देव देव:, नहीं कहते? तो यह किस के लिए कहा गया ?

 

दूसरी बात है अगर कोई हमसे पूछे तुम्हारा नाम क्या है ? अगर हम कहें हिन्दू, फिर वह पूछेगा कौन हिन्दू ? कारण हिन्दुओं में भी हिन्दू, जो कहीं जाती के नाम से बटे हैं कहीं सप्रदाय के नाम से भी बटे है | कहीं तो पूजा और पुजनालय के नाम से भी बटे हैं |

 

कारण, कोई शाकाहारी, हो या मांसाहारी, सदाचारी हो या दुराचारी, निर्व्यसनी हो या व्यसनी, ढोंगी हो या पाखण्डी राक्षस हो या देवता. धूर्त हो या छली, जो हलाल भी खाता, और झटके का भी खाता, जो मंदिर में जाता और मजार में भी जाता |

 

यहाँ सारा काम तो हिन्दू ही करता है, तो हिन्दू का अर्थ क्या है ? आर्य का अर्थ तो श्रेष्ठ है ईश्वर पुत्र है ईश्वर आज्ञा का पालन करने वाले का नाम आर्य है | पर हिन्दू कौन है क्या अर्थ है हिन्दू का, हिन्दू हम किसको कहें गे ?

देखें महाराणा प्रताप हिन्दू थे इनके सभी भाई हिन्दू थे, दोनों भाई शिकार को गये एक जगंली सुवर को दोनों ने तीर मारी –दोनोंकी की तीर से सुवर मरा दोनों भाई आपस में लड़े, और छोटा भाई राणा के विरोधी अकबर से जा मिला |

 

यह हैं हिन्दू अगर आर्य होते शिकार ही नही करते, कारण आर्यों का पहला ही उपदेश अहिंसा है कारण हिंसा करने वाला परमात्मा को नहीं पा सकता | और आर्यों का लक्ष ही है उन पिताओं का पिता परम पिता परमात्मा को पाना, जिसे पाने में अहिंसा जरुरी है | और हिंसा किये बिना मांस का पाना संभव नही, यही हिन्दू वलि चडाता है, फिर सत्य क्या है ? जिसे हम अपनाएं वह सत्य यही है जो हवाला मै दे रहा हूँ |

महेन्द्रपाल आर्य वैदिक प्रवक्ता =दिल्ली =14 /12 /20 ===

 

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