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आज आर्य लोगों से एक राय लेना चाहता हूँ |\

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आज आर्य जनों से एक राय लेना चाहता हूँ ||
मुझे आर्य समाज में लाया ऋषि दयानंद जी के विचार और उनके मंतावों ने |
ऋषि ने स्पष्ट लिखा मेरा अलग कोई मत या पंथ चलाने का लेश मात्र भी अभिप्राय नहीं केवल सत्य का प्रतिपादन ही एक मात्र उद्देश्य है |

और आगे बताया वह सत्य जो ब्रह्मा से लेकर जैमिनी पर्यंत तक ऋषियों के चलाये हुए हैं उसी का ही मैं प्रतिपादन चाहता हूँ | अब इस सत्यता का प्रचार के लिए मेरे उँगलियों का पलिता बनाकर कोई इसे आग में जलाये फिर भी मैं सत्य का ही प्रचार करूँगा |
ऋषि आगे और बतलाते हैं कि सत्य को बोलना और बुलवाना, तथा असत्य को छोड़ना और छुड़वाना मैं अभीष्ट समझता हूँ |

यह हैं ऋषि दयानन्द जी के विचार इसे पढ़कर मैं ऋषि के विचारों से प्रभावित हुआ, और अपना घर बार सभी रिश्ते नाते वालों से संपर्क छोड़ा और आज 40 वर्ष हो रहा है मुझे वैदिक मान्यता को उजागर करते हुए |

देश विदेशों में इसी सत्यता को उजागर करते हुए मेरे कार्य को देख कर अनेक मत पंथ वालों नें मुझे खरीदने का प्रयास किया जो सभी प्रमाण youtube में आप लोग देख सकते हैं या देखा होगा |

इस 40 वर्षों के दरम्यान जो मैं देखा और पाया है जो लोग ऋषि दयानन्द जी के बनी हुई संस्था आर्य समाज के नाम से है इसमें अधिकांश विद्वान अधिकारी सन्यासी महात्मा आर्य कहलाने वालो सत्य से अपना नाता छोड़ रखा है | और सभी कार्य इनके अवैदिक सिधांत विहीन ही है |

यही कारण बना कि हिसार के बालसमंद रोड के एक मनीषी जो श्री सीताराम आर्य और बानप्रस्थ लेने के बाद जिन्हें आर्य मुनि जी के नाम से पुकारा गया | उन्हों ने एक संस्था बनाई थी ऋषि सिद्धान्त रक्षणी सभा के नाम जिस सभा का मैं मंत्री भी रहा एक पत्रिका निकलती थी जिसका मैं संपादक भी रहा आदि |

मेरे सम्पदीय लेख ने आर्य कहलाने वालों को झकझोर दिया करता था | रविबारिय सत्संग में लोग मेरे सम्पादकीय लेख को पढ़ कर सुनाते थे | बड़ी लम्बी कहानी है मेरे संपादन कार्य छुटने से वह पत्रिका बंद हो गई |

तो आज मैं आप लोगों से यही अपील करता हूँ कि ऋषि दयानन्द जी कि वैदिक मान्यता कि रक्षा के लिए हमें एक संस्था बनानी चाहिए आप लोग संस्था का नाम क्या हो हमें दर्शा कर अनुग्रहित करें | धन्यवाद के साथ महेन्द्र पाल आर्य ||

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