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आर्य जनों को चाहिए सने को पह चानना |

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आर्य जनों को चाहिए समय को पहचानना ||
इसदेश का नाम सृष्टि के आदि से आर्यावर्त है, समय समय पर शासकों द्वारा इस देश का नाम बदलता गया |
 
जो कोई आया इसका नाम बदला कभी हिदुस्तान तो कभी इण्डिया | आदि सृष्टि से लेकर यह देश आर्यवर्त के नाम से इस का नामकरण हुआ | प्रथम से लेकर अब तक हमारे ऋषि और मुनियों ने इस देश में वेदों का प्रचार किया |
 
यहाँ तक की उस काल से लेकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के काल जिसे आज से साढ़े नौ लाख वर्ष कहा जाता है जिन्हें आर्य पुत्र कहके पुकारा जाता है |
 
महाभारत काल भी आज से पांच हज़ार साल पहले का है वहाँ भी गांधारी अपने पति को आर्य पुत्र कहती है जैसा श्री राम को आर्य पुत्र कहा गया ठीक उसी प्रकार से श्रीकृष्ण युग में भी आर्यपुत्र के नाम से हम जाने जाते रहे हैं |
 
आज भी भारतियों के किसी घर कोई संस्कार होता है इसके लिए संकल्प में भी आर्यवार्त देश अंतर्गते कहा जाता है | तो सृष्टि से लेकर अब तलक जब हमारा नाम आर्य कहा गया तो यह देश आर्यों का ही है यही प्रमाण मिला |
 
अब इस देश को महमूद मदनी और असदुद्दीन ओवासी जैसे लोग यह देश हमारा है, यह कैसा कह सकता है ? जिनके जन्म लेते ही कान में अल्लाहुअकबर की आवाज सुनाई जाती हो ? अराबियन नाम रखे जाते हों, होश सँभालते जिनकी खतना की जाती हो | दस वर्ष की आयु में जिन्हें नमाज पढना जरूरी हो गया वह, लोग इस देश के कहाँ से हैं ? जिनका सारा काम अरब देश से जुड़ा हो अरब की तरफ मुह करके नमाज पढ़ते हों सारा पर्व अरबी चाँद देखकर मानते हों, यह देश उनका कैसा ?
साहब यह तो जीते जी की बात है मरने के बाद जिनकी जुबान अरबी हो जाती हो वह इस देश के कैसे ? मरने के बाद भी जो अरबी स्थान चिल्लाते हों अरबी जुबान में बोलने लगते हों यह मान्यता जिनकी है उनका यह देश कैसा ? सारा काम जिनका अरबी से जुड़ा हो उनका यह देश कैसा ?

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