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आर्य जनों से गुजारिश सत्य एक है ||

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आर्य जनों से गुजारिश सत्य एक है ||
सत्य को धारण करना मानवों का काम है, मानवों से इतर सत्य असत्य का ज्ञान किसी और प्राणियों में नहीं है |
 
मानवों का नाता सिर्फ और सिर्फ सत्य से ही हैं जो मानव बनकर धरती पर आया और सत्य से नाता तोडा वह धरती पर मात्र भार ही है इससे ज्यादा कुछ नहीं |
 
मानव बनने का तात्पर्य है उसके किये कर्म ने ही उसे मानव योनी को प्राप्त कराया, इसलिए उसे चाहिए परमात्मा का आभार व्यक्त करना उसे धन्यवाद देना की परमात्मा आपने मुझे मानव बनाकर धरती पर भेजा है, हमारा किया कर्म था जिसका फल आपने हमें दिया है |
 
आप की बहुत बड़ी दया है की आपने हमें पागल बनाकर नहीं भेजा, अपाहिज बनाकर नहीं भेजा क्यों की वह मानव योनी में आकर भी अपने कर्मों का फल भोग रहां हैं | आप ने हमें स्वस्थ सबल दिमाग वाला बनाकर भेजा हैं तेरा लाख लाख शुकर है हम तेरी उपासना कर सकते हैं तेरी प्रशंसा करने के योग्य हमें बनाया |
 
अब मानव बनकर ही उसी परमात्मा को मानने से इनकार करे तो क्या वह मानव कहलाने के हकदार हो सकते हैं ? इससे बड़ा एहसान फरामोशी और क्या हो सकता है दुनिया में ? आज धरती पर नास्तिकों द्वारा यही तो हो रहा है की जिन्हों ने उसे स्वीकारना ही नहीं चाहां , यह मानवता पर कुठाराघात नहीं तो और क्या है? सिर्फ इतनी सी बात को मानव गंभीरता से विचार करें तो हक़ न हक़ को भी समझ सकता है |
 
व्यक्ति गत मेरा किसी से कोई विरोध नहीं है और न मेरा मकसद किसी का विरोध करने का है, मेरा काम मात्र लोगों के बीच सत्य और असत्य की जानकारी देना है | सत्य का धारण और असत्य का त्याग ही मानव मात्र का धेय होना चाहिए और यही याद दिलाना मेरा फ़र्ज़ है | महेन्द्रे पाल आर्य =6/9/22

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