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आर्य समाज में कब्ज़ा जमाये पांडा पुजारी |

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आर्य समाज में कब्ज़ा जमाये पांडा पुजारी ||
आर्य समाजी पागल खाने भेजने लायेक हो गये क्यों ? तो यहाँ देखें रोग निवारक महायज्ञ करने जा रहे हैं | पहले तो यह लोग प्रचार करते थे वेद पारायण यज्ञ उसके बाद करने लगे चतुर्वेद शतकम महायज्ञ | अब यह रोग निवारक महायज्ञ करने लगे | कौन समझाए इन पागलों को की यह ऋषि दयानन्द की मान्यता नहीं है | ऋषि ने कहीं भी नहीं बताया की इसप्रकार का कोई यज्ञ किया जाय | यज्ञ का करने से लाभ क्या है इनमें तीन की शिक्षा ऋषि ने बताई है >
 
1 देवपूजा = देवताओं की पूजा होती है, अग्नी को सभी देवताओं का मुख बताया है एक अग्नी देव को खिलाने से सभी देवताओं का खाना होजाता है | इस लिए यज्ञ को देवपूजा कहा गया | 2 संगती करण – साथ मिल कर बैठना बिना भेदभाव के साथ आहुति देना आदि = 3 दान अर्थात इदन्नमम की भावना रखकर तदनुसार अपने को बनाना |
 
यज्ञ से इन तीनों की शिक्षा बताई गई है | इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं है लेकिन यह पांडा पुजारी आर्य समाज में भी अपना कब्ज़ा जमा लिया है मैंने लिखा तथा कथित आर्य समाजी बनाम रट्टू तोता | आर्य समाज में बढ़ रहा है निरंतर पांडा गिरी, यह सब लोग ऋषि दयानन्द जी का गला घोटने में लगे हैं | ऋषि ने जो मन्त्र आहुति के लिए नहीं लिखा है यह लोग उन्ही मन्त्र को बोलते हैं | जैसा त्रियम्वाक्म मन्त्र से आहुति किसी भी संस्कार में अथवा किसी भी कर्म कांड में ऋषि ने नहीं लिखा है |
पर यह पांडा पुजारी इस मन्त्र से आहुति देने में नहीं चुकते यही हो रहा है आर्य समाज में | यह लोग कितने पागल हैं देखें अपने नाम से पहले आचार्य लिखते, उसके बाद शास्त्री लिखते हैं | इन पागलों से कोई पूछे आचार्य =MA, और शास्त्री =BA , की मान्यता होती है पहले कोई MA लिखे फिर उसके बाद BA लिखे क्या MA के बाद BA होता है ? इन्हें इतनी सी भी अकल नहीं है इन आचार्य लिखने वालों को क्या लिखा है अपने नाम से यह भी समझदारी नहीं | 15/9/22

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