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इसलाम का आधार ही अन्ध विश्वास है |

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जिस इस्लाम का आधार ही अन्ध विश्वास है ||

|| इस्लाम का आधार हीअन्ध विश्वास है || मै मात्र नमूना बता रहा हूँ, इस्लाम जगत के एक नामी गिरामी आलिम है जो देवबन्दी जमात में मशहूर हैं, जिन्हें हकिमुल उम्मत हज़रत मौलाना अशरफ अली थानवी {रहमतुल्लाह }अलैहे के नाम से इस्लाम जगत जानते है | जिनकी लिखी अनेक किताबें हैं, अनगिनत ,उसमे एक किताब शरियत की भी है {इस्लामी कानून } जिस किताब का नाम है बेहश्ती जेवर {स्वर्ग की गहना } बड़ी और खूब मोटी किताब है जिसमे 752 पेज है, फिर कुछ कशीदाकारी भी है कुछ पेजों में | इस किताब के प्रथम भाग में चार {4} किस्से भी लिखे हैं, अब वह किस्सा किस प्रकार के अन्ध बिश्वास पर आधारित है वह सुनने वाली है |

किस्सा इस प्रकार है :- एक बार हज़रत उम्मे सल्मा {र,अ०} के पास कहीं से कुछ गोश्त आया तरकारी या सालंद बनकर– और जनाब रसूले खुदा {स}को गोश्त बहुत अच्छा लगता था –इसलिए हज़रत उम्मे सल्मा {र} ने खादिमा से फ़रमाया की यह गोश्त ताक में रख दे शायद हज़रत नोश फरमाए – उसने ताक में रख दिया – इतने में एक सायल {मांगनेवाला }आया और दरवाजे पर खड़े होकर अवाज दी –भेजो अल्लाह के नाम पर खुदा बरकत करने वाला है | घर में से जवाब दिया खुदा तुझ को भी बरकत दे – इस लफ्ज़ में यह इशारा है की कोई चीज देने को मौजूद नहीं, वह सायेल चला गया इतने में हुजुर {स} तशरीफ़ लाये,और फ़रमाया ऐ उम्मे सल्मा तुम्हारे पास खाने की कोई चीज है ? उन्हों ने कहा हां है, और खादिमा {सेविका }से कहा जा वह गोश्त आप के वास्ते लेकर आ | वह गोश्त लेने गयी, देखती क्या है की वहां तो गोश्त का नाम भी नहीं, फ़क्त एक सफेद.पत्थर का टुकड़ा रखा है | आप ने {हुजुर,स} ने फ़रमाया चूंके तुमने सायेल को नहीं दिया था इस लिए वह गोश्त पत्थर बन गया | यह किस्सा उस किताब में तीसरी किस्सा है पेज 41 -42 में | कुरान में भी इस प्रकार के कई किस्से है मैंने अपनी पुस्तक वेद और कुरान की समीक्षा में दिया है | एक आदमी अपना खाने पीने का सामान रख कर एक पेड़ के नीचे बैठ गया अपने गधे को वहीँ बांध दिया उसे नींद लगी- वह सो गया, अल्लाह ने उसकी रूह निकाली 100 साल के बाद उसमें रूह डालदी, और पूछा तुम कितने दिन से सो रहे हो ? उसने कहा एक दिन भी पूरा नहीं हुवा | तब अल्लाह ने कहा देखो तुम्हारा गधे का पिंजर {हड्डी} दिख रहा है तुम 100 साल से सो रहे हो |

 

कुरानी गप्प की खूबसूरती यह है की उस बेचारे के गधे का तो 100 साल में पंजर बन गया, किन्तु उसने जो खाने पीने की सामान रखा था वह तरोताजा रहा |

 

इस्लाम इसी अंध परम्परा को सही मानता है, इस्लाम से बढ़ कर धरती पर कोई अंध विश्वासी नहीं है | मै कुरान का भी वह आयात यही दे देता हूँ जिस से आप लोगों को पढने में सुविधा हो जाये

أَوْ كَالَّذِي مَرَّ عَلَىٰ قَرْيَةٍ وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ

عُرُوشِهَا قَالَ أَنَّىٰ يُحْيِي هَـٰذِهِ اللَّهُ بَعْدَ مَوْتِهَا ۖ فَأَمَاتَهُ اللَّهُ مِائَةَ عَامٍ ثُمَّ بَعَثَهُ ۖ قَالَ كَمْ لَبِثْتَ ۖ قَالَ لَبِثْتُ يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ ۖ قَالَ بَل لَّبِثْتَ مِائَةَ عَامٍ فَانظُرْ إِلَىٰ طَعَامِكَ وَشَرَابِكَ لَمْ يَتَسَنَّهْ ۖ وَانظُرْ إِلَىٰ حِمَارِكَ وَلِنَجْعَلَكَ آيَةً لِّلنَّاسِ ۖ وَانظُرْ إِلَى الْعِظَامِ كَيْفَ نُنشِزُهَا ثُمَّ نَكْسُوهَا لَحْمًا ۚ فَلَمَّا تَبَيَّنَ لَهُ قَالَ أَعْلَمُ أَنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

सूरा बकर आयात {259} अब पढ़े लिखे लोग बताएं की इस अंध विश्वास का क्या दाद दिया जाये ? कुरान ही गवाह है की कुरान किस्सा और कहानी की किताब है | सूरा यूसुफ़ में कहा गया “ नहनु नाकुस्सो अलैका अह्सनल कसासे,बिमा आव हैना इलैका हाज़ल कुरान,व इनकुनता मिन कब्लिही ल मिनल गाफेलिन |

 

نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ اَحْسَنَ الْقَصَصِ بِمَآ اَوْحَيْنَآ اِلَيْكَ ھٰذَا الْقُرْاٰنَ ڰ وَاِنْ كُنْتَ مِنْ قَبْلِهٖ لَمِنَ الْغٰفِلِيْنَ Ǽ۝

अर्थ :- हम आप को एक किस्सा बयान कर रहे हैं कुरान के जरिये जिस किस्से  से आप गाफिल थे | कुरान ही गवाह है की यह किस्सा, कहानी की किताब है, और यह किस्सा भी यूसुफ़ नामी पैगम्बर का है | इनके पिता का नाम याकूब था जिसने अपने मामा के लड़की से शादी की एक का नाम था लाया, दूसरेका नाम राहील यह दोनों सगी बहन थी,याकूब अपने मामा के घर बकरी चराते थे, छोटी लड़की राहील से मन लग गया हज़रत याकूब अल्लाह के पैगम्बर का | मामा ने कहा बड़ी लड़की को छोड़ दुसरी से शादी, नहीं होगी तुम्हे बड़ी लड़की से ही शादी करनी होगी | पर याकूब ने दूसरी के लिए कहा, मामा ने बोला की तुम सात साल और बकरी चराव, ऐसा ही किया नबी अल्लाह के याकूब ने | उसवक्त दोनों बहनों से शादी करना जायेज था, इसके बाद से अल्लाह ने मना किया, कहा वाअन्ताज मायू बैनल उखुतैने इल्ला मा कद सलफ | अर्थ :- दोनों बहनों को एक साथ इकठ्ठा करना हराम है |

 

नोट :-विचारणीय बात है की अल्लाह को नियम बदलना पड़ गया, कुरान ईश्वरीय ज्ञान न होने का प्रमाण यह भी मिल गया. परमात्मा अपना ज्ञान बदलने लगे वह पूर्ण ज्ञानी नहीं हो सकता, कारण परमात्मा का ज्ञान पूर्ण है ज्ञान बदलने से उसपर दोष लगेगा, जो दोष अल्लाह पर लगा है | इससे पहले जो हो गया सो हो गया अब दोनों बहन को एक साथ शादी न करो, यह कहना है अल्लाह का | अल्लाह को पहले दोष मालूम नहीं पड़ा इस काम को करने से ?

दो बहन को एक साथ पत्नी बनाने को अल्लाह ने रोका कुरान में | अगर पहले वाली पत्नी मर गयी हो या चली गयी हो, या फिर तलाक दिया हो, जब कोई दूसरी पत्नी की बहन से निकाह करे | याद रखना पहले जिसने इस काम को किया उसमे अल्लाह को दोष मालूम नहीं पड़ा, यह हज़रत याकूब के काल में था जो हज़रत मुहम्मद के काल में वह मना कर दिया अल्लाह ने, अल्लाह अपना ज्ञान किस प्रकार बदला है |

 

اِذْ قَالَ يُوْسُفُ لِاَبِيْهِ يٰٓاَبَتِ اِنِّىْ رَاَيْتُ اَحَدَ عَشَرَ كَوْكَبًا وَّالشَّمْسَ وَالْقَمَرَ رَاَيْتُهُمْ لِيْ سٰجِدِيْنَ

۔

क्या कहा कुरान में अल्लाह ने देखें :-

व इस काला यूसुफो लीआबिहे या आबते इन्नी राअईतो, अहादा आशारा काव कबँव वशशमसा, वल कमारा राअइ तुहुम ली साजेदीन |

अर्थ :-जबके यूसुफ़ ने अपने बाप से जिक्र किया के अब्बाजान मैंने 11 सितारों को और सूरज, चाँद. को देखा के वह सब मुझे सिजदा कर रहे हैं |

नोट:- कुरान का किस्सा सुनें दुनिया वालों,सितारा,सूरज,चाँद.यह सब हज़रत यूसुफ़ को सिजदा कर रहे हैं, यह ख्वाब में देखा इस खव्वाब का अर्थ पिता याकूब ने बेटे को बताया तुम्हारे जो सौतेले भाई हैं 11, यानि विमाता या मौसी पुत्र जो तुमसे जलते हैं, वह सब तुम्हारे क़दमों में गिरेंगे | अगर यह मान लिया जाये की वह सौतेले भाई अगर सितारे हो गये ,किन्तु कुरान का अल्लाह सूरज और चाँद किसे  कहा ?

इस कुरानी किस्से से मुझे याद आ रहा है अभी उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में ठीक ऐसा शोभन सरकार नामी गुरु के शिष्य ने ख्वाब देखा कहीं मंदिर के नीचे धन गड़ा है वह ख्वाब दिल्ली में भारत सरकार तक पहुची खुदाई चालू हो गया पहाड़ खोद डाले, लोग कहते हैं निकली चुहिया, पर वहां कुछभी नहीं निकला अब हज़रत यूसुफ़ के ख्वाब के साथ अल्लाह का क्या वास्ता ?

जो कुरान अल्लाह का दिया उपदेश मानव मात्र के लिए है, ज्ञान बताया जाता है,  किन्तु इस किस्से से मानव समाज को क्या मिल रहा है ? जहाँ  एक पैगम्बर की पारिवारिक कहानी है, भाई भाई में शत्रुता,पिता बेटे के वियोग से परेशान |

इसी पैगम्बर युसूफ का किसी एक बादशाह की पत्नी का प्यार का शिकार होना उसमे अल्लाह का गवाही देना किस्सा वाकई में रोमांटिक है |  जिसे लोग  कलामुल्लाह कह रहे हैं इस किस्से को कुरान में बताया है | अथवा इस किस्से को इस्लाम वाले कलामुल्लाह मानते है,क्या सही में यह ईश्वरीय ज्ञान होना सम्भव हैं ? ईश्वरीय ज्ञान होना कुरान का पढ़े लिखे लोग ही इसपर विचार करें |  मै फिर लिख रहा हूँ इस कुरान को कोई भी कलामुल्लाह सिद्ध कर दिखाए यह मेरी खुली चूनौती.है |

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