Vaidik Gyan...
Total:$776.99
Checkout

इस्लाम इन्सान को अंध विश्वासी बनता है ||

Share post:

इस्लाम इन्सान को अंध विश्वासी बनता है ||
इस्लामिक मान्यता तो पहले लिख आया हूँ की अच्छे और बुरे का किस्मत अल्लाह ने बनाया है | जब अल्लाह ने दुनिया बनाई तो कलम पहले बनाया इन्सान की किस्मत लिखने के लिए | परन्तु वैदिक मान्यता को जानने पर इसमें सवाल आया की अल्लाह ने कलम बनाई तो किस चीज से बनाई कलम बनाने का उपकरण क्या था ?{जिसने कलमके ज़रिये से तालीम दी}
الَّذِي عَلَّمَ بِالْقَلَمِ [٩٦:٤]
अब सवाल यही आया की कलम को अल्लाह ने बनाई किस चीज से ? उसमें काली रौशनाई या फिर रिफिल अल्लाह को कहाँ से और किस्से मिली ? जब अल्लाह को निराकार बोला तो लिखा कौन ? कलम के जरिये से तालीम दी तो जरुर लिख कर ही दिया होगा लिखा किस पर कागज या कागज जैसे उपकरण क्या था जिसपर लिखा गया ? यह सभी सवाल वैदिक मान्यता के आधार पर ही सामने प्रस्तुत हो पाया |
लिखने के लिए तीन चीज चाहिए जैसा लिखने वाला – जिसके द्वारा लिखा गया,या जिसके सहारे से लिखा गया –और जिस के लिए लिखा गया हो | किसी भी चीज को बनाने के लिए तीन चीज की जरूरत होती है उसके बगैर किसी भी चीज का बनाया जाना संभव कहाँ ? यही शिक्षा वैदिक ज्ञान से प्राप्त हुवा जो इस्लाम में नहीं मिला था | इस्लाम की पढाई में और इमामत करने के काल में भी यही मानता रहा मन में कभी यह सवाल ही नहीं आया और न इसपर कभी सवाल उठ सकता है यह भी नहीं सोचा |
वैदिक मान्यता और वैदिक सिद्धांत ने हमें यह ज्ञान कराया | यही कारण बना की मैं वेद और कुरान की समीक्षा लिख कर दुनिया वालों को सत्य असत्य बताने का प्रयास कर रहा हूँ | हम मानव होने के कारण मानवता का आधार क्या है उसे जानना जरूरी है | कुरान की जो तालीम मैंने पाई या जो इस्लामिक शिक्षा को मैंने हासिल किया, उसमें यही तो पाया ईमान के दायरे में, की इसमें बताई गई या लिखी गई बातों पर आप सवाल नहीं कर सकते| वैदिक मान्यता ने हमें यह बताया {यसतर्केणअनुसंद्ध्त्ते} अर्थात बात को तर्क के कसौटी पर विचार कर जो सत्य हो उसे मानें जो खरा न उतरे उसे मानने की जरूरत नहीं | परन्तु इस्लाम में तर्क नहीं है, किसी भी बात पर सवाल उठाना सम्भव नहीं जो बातें लिखी गई उसे ही सत्य मानना पड़ेगा जैसा अल्लाह ने फरमाया >

Top