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इस्लाम कोई धर्म नहीं, मजहब है व्यक्ति द्वारा ||

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इस्लाम कोई धर्म नहीं, मजहब है व्यक्ति द्वारा ||
यानि यही है मजहब, जिस के जन्मदाता की ही पारिवारिक चर्चा है और धर्म में किसी व्यक्ति कि चर्चा संभव ही नहीं, कारण जरूर समझ गये होंगे कि यह हज या परिक्रमा एक मजहब वालों का है, सम्पूर्ण मानव मात्र के लिए नहीं। धर्म अगर किसी वर्ग विशेष के लिए हो तो परमात्मा पर दोष लगेगा और यहाँ अल्लाह खुद इस काम का आदेश दे रहे हैं यही भेद है धर्म और मजहब में। धर्म में किसी मुल्क या स्थान विशेष कि न तो परिक्रमा है न कहीं किसी पहाड़ों में दौड़ने की बात और न ही किसी कुंवा से पानी उठाने की बात और न ही किसी पशु की कुरबानी की बात और न पापको माफ करने की बात है ।
 
अगर हज में जीवहत्या धर्म है, तो अधर्म लोग किसे कहेंगे?
 
मैं लिखा था यह जो प्रवाद सौ चूहा खाके बिल्ली हज को चली, यह किसने बनाई किसलिए बनाई थी।
अब यह बात समझ में आ रही है कि आखिर जिसने भी बनाई सोच समझकर ही जरुर बनाई होगी।इसका तात्पर्य यह है कि हज करने से पापसे मुक्ति मिलती हैऔर उसी हज करते समय पशु काटा जाता है।
यानि पशु हत्या कर भी लोग पापसे अपने को मुक्ति पाना समझते हैं। शायद इसलिए ही इस प्रवाद को बनाने वाले ने कहा होगा कि जीव हत्या पाप है और पाप कर भी जो लोग पापसे अपने को मुक्त मानते हैं उनके लिए ही यह बात कही कारण मुसलमानों को छोड़ कोई हज करने नहीं जाता, और न किसी को जाने दिया जाता।
अगर गैर मुस्लिम जाना भी चाहे तो भी उन्हें अनुमति नहीं है कुरान में अल्लाह ने मना फरमाया की कोई गैर मुस्लिम को आने न दिया जाय |
 
अब समझें अल्लाह का क्या स्वार्थ है इसमें अल्लाह किस लिए किसी को मना करें ? इस लिया अल्लाह मानव मात्र का नहीं है सिर्फ और सिर्फ इस्लाम से अल्लाह का संपर्क है |
यही कारण है की अल्ल्लाह और ईश्वर अलग अलग हैं अल्लाह ईश्वर तेरो नाम यह सरासर झूठ प्रमाणित हो गया | इतना प्रमाण मिलने के बाद अगर हिन्दू यह कहें तो उन्गें पागल खाने में भेजना चाहिए | महेन्द्र पाल आर्य 16 अगस्त 22

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