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ईश्वर के बारे में वेद और कुरान की भिन्नता को देखें |

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ईश्वर के विषय में वेद और कुरान की भिन्नता को देखें ||
य आत्मदा बलदा यस्य विश्व उपासते प्रशिषं यस्य देवा:|
यस्य छायाsअमृतं यस्य मृत्यु: कस्मै देवाय हविषा विधेम ||
अर्थ :- जो आत्म ज्ञान का दाता, शारीर आत्मा और समाज के बल का देनेहारा, जिसकी सब विद्वान् लोग उपासना करते हैं, और जिसका प्रत्यक्ष सत्यस्वरूप शासन और न्याय अर्थात शिक्षा को मानते हैं, जिसका आश्रय ही मोक्ष –सुखदायक हैं, जिसका न मानना अर्थात भक्ति न करना ही मृत्यु आदि दुःख का हेतु है, हम लोग उस सुखस्वरुप सकल ज्ञान के देने हारे परमात्मा की प्राप्ति के लिए आत्मा और अन्तःकरण से भक्ति अर्थात उसी की आज्ञा पालन करने में तत्पर रहें |
अब इस एक वेदमन्त्र के साथ कुरान को मिला कर देखते हैं की दोनों में कुछ मेल है क्या ? इस वेद मन्त्र में बताया गया जिसका आश्रय ही मोक्ष सुखदायक है | परन्तु कुरान में मोक्ष की बातें नहीं है, जन्नत की बातें हैं, और अनेक प्रकार की सुख की बातें बताई गई है | जहां शराब, कवाब, और शबाब की बातें बताई गई है, मोक्ष का अर्थ हम सुख दायक मानते हैं | जहां परमात्मा से आनंद को प्राप्त करने की बातें हैं, अर्थात परमात्मा आनंद स्वरुप हैं उसके आनंद को प्राप्त करना ही मानवों का लक्ष्य है | इसे हर कोई मानव कहलाने वाला प्रयास कर सकता है जो इसके लिए प्रयास करेगा उसे प्राप्त हो सकता है | परमात्मा ने यह कहीं भी नहीं कहा की हिन्दू ही इसे प्राप्त कर सकता है, अथवा कोई ईसाई और मुसलमान का नाम नहीं है ईश्वर के पास |
तो देख लिया आप लोगों ने वेद में परमात्मा का उपदेश को, अब हम इसी प्रकरण को अल्लाह का उपदेश कुरान में क्या बोला गया है उसे भी देखेंगे |
كَلَّا إِنَّ كِتَابَ الْأَبْرَارِ لَفِي عِلِّيِّينَ [٨٣:١٨]
अर्थ:- यह भी सुन रखो कि नेको के नाम ए अमाल इल्लीयीन में होंगे | 83/18 नोट:-मरने के बाद आत्मा को कैद कर दिया जायेगा, जिसका नाम इल्लीयीन एक जगह है | यहाँ बताया गया है की नेकी और बदी करने वालों की आत्मा को कैद करेंगे, जब की वैदिक मान्यता है की आत्मा को कैद किया जाना सम्भव नहीं |
وَمَا أَدْرَاكَ مَا عِلِّيُّونَ [٨٣:١٩]
अर्थ:-और तुम को क्या मालूम कि इल्लीयीन क्या है वह एक लिखा हुआ दफ्तर है| 83/19
كِتَابٌ مَّرْقُومٌ [٨٣:٢٠]
अर्थ :- जिस में नेकी के आमाल दर्ज हैं | 83/20
يَشْهَدُهُ الْمُقَرَّبُونَ [٨٣:٢١]
अर्थ : उसके पास फ़रिश्ते हाजिर हैं |83/21
إِنَّ الْأَبْرَارَ لَفِي نَعِيمٍ [٨٣:٢٢]
अर्थ :-बेशक नेक लोग नेमतों में होंगे | 83/22
عَلَى الْأَرَائِكِ يَنظُرُونَ [٨٣:٢٣]
अर्थ :- तख्तों पर बैठे नजारे करेंगे | 83/23
تَعْرِفُ فِي وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ النَّعِيمِ [٨٣:٢٤]
अर्थ :-तुम उनके चेहरों ही से राहत की ताजगी मालूम कर लोगे | 83/24
يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍ مَّخْتُومٍ [٨٣:٢٥]
अर्थ :- उनको सर ब मोहर खालिस शराब पिलाई जाएगी | 83/25
خِتَامُهُ مِسْكٌ ۚ وَفِي ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ الْمُتَنَافِسُونَ [٨٣:٢٦]
अर्थ :- जिसकी मोहर मिश्क की होगी और उसकी तरह अलबत्ता शायकीन को रगबत करनी चाहिए | 83/26
وَمِزَاجُهُ مِن تَسْنِيمٍ [٨٣:٢٧]
अर्थ :- और उस शराब में तसनीम के पानी की अमेजिश होंगी | 83/27
عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا الْمُقَرَّبُونَ [٨٣:٢٨]
अर्थ :- एक वह चश्मा है जिसमें मुकरेबीन पियेंगे | 83/28
إِنَّ الَّذِينَ أَجْرَمُوا كَانُوا مِنَ الَّذِينَ آمَنُوا يَضْحَكُونَ [٨٣:٢٩]
अर्थ :- बेशक जो गुनाहगार हँसी किया करते थे | 83/29
وَإِذَا مَرُّوا بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ [٨٣:٣٠]
अर्थ :- और जब उनके पास से गुजरते तो उनपर मजाक करते थे | 83/30
यह कुछ प्रमाण मैंने कुरान से दिया है ऊपर वेद से बताया था मोक्ष सुख दायक याहं कुरान का सुख दायक लिखा हूँ जहां कुरान में दो भाग बताया गया एक नेक कार्य करने वाला | दूसरा बद कार्य करने वाला, इन दोनों की रूह को कब्ज़ा कर के बन्द कर दिया जायेगा जिसका नाम ईल्लीयींन, और सिजजिन बताया गया है | इसमें भी सबसे ज्यादा ध्यान करने वाली बातें है की जो नेक लोग होंगे उन्हें ईमानदार बताया गया है, अर्थात जिन्हें मुसलमान कहा गया है |
महेन्द्र पाल आर्य

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