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ऋषि दयानन्द का सपना साकार होगा वेद प्रचार से |

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ऋषि दयानन्द का सपना साकार होगा वेद प्रचार से ||
आर्य समाज के तीसरे नियम में ऋषि ने यही लिखा है वेद का पढ़ना और पढ़ाना सब आर्यों का परम धर्म है |
 
आज आर्य समाज के अधिकारियों ने आर्य समाज से धन कमाना, आर्य समाज को लूटना ही परम धर्म माना है | मुझे तो देखते देखते 39 वर्ष हो गया अगले सप्ताह 40 वर्ष में प्रवेश करेंगे,आर्य समाज का प्रचार करते | इन लोगों को बहुत नजदीक से जानने और समझने का अवसर मिला है |
 
यहाँ अधिकांश लोग है जिन्होंने आर्य समाज को आय समाज कहा है वेद कुमार वेदालंकार जी ने इसे आय समाज बनाकर ही आय कर रहे हैं बताया |
 
जो जहां बैठे हैं उन्हें केवल कमाई चाहिए वरना दिल्ली के जनकपूरी इलाके में चार मंजिला मकान बनाना कहां से आया धन ?
ऐसे एक के पास नहीं हर एक के पास देखा जा सकता है जो जहां बैठा है वह सिर्फ और सिर्फ रोजगार के लिए बैठा है कहाँ से आमदनी हो बस यही लक्ष्य है |
सबसे मोटी और बड़ी कमाई का साधन है इनका विद्यालय |
 
आर्य समाज के अंतर्गत जितने भी मान्यता प्राप्त विद्यालय है उसमें मोटी कमाई होती है | आर्य समाज से इन्हें मान्यता मिली हुई है सरकारी कोई नियंत्रण उस पर नहीं है कमिटी ही उसे चलाती है लेकिन उसे चलाने कि मान्यता इन आय करने वाले अधिकारियों के पास है |
 
यह भारत भर हर प्रान्तों में विशेष कर आर्य समाज से मान्यता प्राप्त विद्यालय इनके हैं इससे मोटी कमाई होती है और भी कई साधन इनके कमाई के है यही तो देखा अब तक |
वेद का पढ़ना पढ़ाना इनके आर्य समाज के नियम में ही लिखा हुआ है इसे चरितार्थ नहीं करते यह लोग | करें भी कौन कैसे, इसमें वेद के पढ़े लोग नहीं है और न विद्वानों को यह अपने पास आने देते हैं | इन्हें मालुम है विद्वान् अनैतिक कार्य को सहन नहीं करेंगे और हमें वह रोकेंगे टोकेंगे इसलिए विद्वानों को आने न दो |
अब कोई कहे कि दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा प्रधान तो गुरुकुल के पढ़े हैं | पहली बात तो यह है कि सही अर्थों में वह गुरुकुलीय शिक्षा पे अमल करते तो कोई भी अनर्थ काम करने से बचते और को भी बचाते ? जो व्यक्ति अपने व्यापार में इनकम टेक्स बचाने को लाखों रुपया रिश्वत दे सकते हैं तो काहे कि गुरुकुलीय शिक्षा ?
इस प्रकार की अनेक बातें हैं कितना लिखूंगा यह लोग आर्य समाज के दीमक हैं, चांट रहे है, आर्य समाज को खोखला कर रहे, आर्य समाज को ऋषि के प्रति इनके मनमें कोई बात ही नहीं है |
न ऋषि के दिए उपदेशों को यह मानते हैं, एक से पैसा लेकर उन्हें पावर ऑफ़ अटोर्नी पत्र लिख कर देते हैं उत्तर प्रदेश में आर्य प्रतिनिधि सभा के माध्यम से यही काम हो रहा है |
 
आर्य समाज में एक का कब्ज़ा है तो उनके विरोधी मोटी रकम सभा के प्रधान को दें, तो उन्हें अधिकार पत्र मिल जाता है इसे अदालत भी चुनौती नहीं दे सकती, और वह लोग पहली कमिटी को निकालकर बाहर कर देते हैं |
 
सम्पूर्ण आर्य समाज में यही हो रहा है, बंगाल सभा के अंतर्गत कई विद्यालय थे इनके निकम्मिपन से बहुत विद्यालय इनसे छीन लिया है लोगों ने, और मुसलमानों के कब्जे में आ गया |
अनेक घटनाएँ है मैं कहाँ कहाँ क्या क्या क्या लिखूं वेद प्रचार इनका गौण रह गया अनैतिक तरीके से आर्य समाज के बिल्डिंग को विवाह शादी में किराया पर देकर नोट कमाते हैं | यह कमी दिल्ली मुंबई में ज्यादा है | अनैतिक शादियाँ करते हैं प्रमाण पत्र भी देते हैं कई जगह फर्जीवाडा का भी पर्दा फाश हुवा |
 
मेरे एक के विरोध करने से उतना लाभ नहीं होगा अगर सब मिलकर इस मुहीम के चलाने वालों का विरोध करें, तो लाभ हो सकता है आन्दोलन से ही यह काम सम्भव है | तो आज से प्रतिज्ञा करें कि सत्य का साथ देंगे असत्य का नहीं ऋषि ने सत्य का धारण असत्य का परित्याग लिखा है |
धन्यवाद के साथ महेन्द्र पाल आर्य = 23/ 11/22

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