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एक पुरानी बात आप लोगों को याद दिलाता हूँ |

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आज एक पुरानी बात याद दिलाता हूँ ||
मेरे आर्य समाज में आने के बाद इन आर्यों की उठा पटक मैंने खूब देखा है |
कारण मुझे भी इस सगठन के लोगों में रहते और काम करते 39 वर्ष समाप्त होने वाला ही है कई महिने बाद ही | अर्थात 30 नवमबर 22 को मुझे 40 वर्ष होंगे |
 
जो आप लोगों को बताना है वह यह है की सार्वदेशी सभा प्रधान लाला राम गोपाल शाल वाले जी ने सन्यास की दीक्षा स्वामी सर्वदानन्द जी जो उन दिनों में आर्य जगत के विद्वान् और सर्वोच्च सन्यासी माने जाते थे उनसे लाला जी दीक्षा लेकर स्वामी आनंद बोध बने |
 
आर्य समाज में इसका विरोध भी खूब हुआ एक समय तो यह भी देखा सन्यासी मंडल सार्वदेशिक सभा के गेट में धरने पर बैठे की इनकी सन्यास का वस्त्र उतार लिया जाए | इसका अधिनायक तो स्वामी वग्निवेश थे,और बहुत सन्यासी भी उनके साथ थे | इसमें स्वामी जगदीश्वरानन्द जी भी थे- उस समाय उन्हें मैं पत्र लिखा था आप भीम सेनी काजल बेचें |
इन दिनों मैं बंगाल सभा में आ गया था, जगदीश्वरानन्द जी ने मुझे पत्र के जवाब में लिखा महेन्द्र जी मैं भीम सेनी काजल बनाता हूँ | अपने को ज्यादा होशियार मान कर मुझे जवाब लिखा | इसका उत्तर में मैंने फिर लिखा बेशक आप बनाते हैं क्या उसे खाने के लिए बनाते हैं या बेचने के लिए ?
 
इन स्वामी जी को मैं जानता था जब यह गोबिन्दराम जी की दूकान नई सड़क में बैठ कर प्रूफ रीडिंग करते थे | उनदिनों गोबिन्द्राम हासानंद जी की दूकान दूसरी थी बहुत बड़ी थी ऊँची बनी थी उस दूकान में बहुत बड़ी जगह थी |
 
आर्य जगत में जो विघटन यह स्वामी जगदीश्वरानन्द ने किया चाहे सत्यार्थ प्रकाश हो या संस्कार विधि हो सब जगह अपनी मनमानी की है जो मान्यता ऋषि दयानंद जी की नहीं है उसी का प्रतिपादन इन महाशय सन्यासी जी ने किया है |
 
कर्म कांड इन की लिखी पुस्तक को अठेया चतुर्वेद शतकम को वैदिक मान्यता विरुद्ध बनाया या लिखा है | जहाँ अन्तेष्टि के मन्त्र हैं उससे यज्ञ में आहुति डलवा रहे हैं | कर्म कांड पर इनसे शास्त्रार्थ हमारी ऋषि सिधान्त रक्षणी सभा ने की है जिस सभा का मैं मंत्री था | इन की यज्ञ कर्मकाण्ड की पुस्तक के एक पेज में आचार्य भाद्र्काम वर्णी जी ने 13 जगह गलतियां निकाली |
 
सबसे ज्यादा धोखा उन्हों ने लोगों को वेद मुफ्त में देंगे करके प्रचार किया 600 रुपयों में सत्यार्थ प्रकाश बेचा वेद किसी को दिया ही नहीं | वेद के नाम से यह अनर्थ किया | इस कार्य को पंडिता राकेश रानी जी ने भी की थी | जो इन सन्यासी के वेद के नाम जनता को लूटा इसका प्रचार करने वाला था विजय झा आज वह शायद जेल में ही है इस ठगी के कारण |
 
पर मैं लिखना कुछ और चाहां यहाँ प्रकरण बदल गया इन लोगों पर जहां लिखना चाहेंगे एक विषय ही बन जाना स्वाभाविक है | यह आर्य समाज के लोगों का किया कर्म ही मुझे ऐसा मिला | लोग मुझपर ऊँगली उठाते हैं की दूसरी शादी की, एक ने तो तीन बता दिया मेंरी मज़बूरी क्या थी इसे किसी ने जानने का प्रयास नहीं किया | जब की इस्लाम में रह कर मैं चार शादी कर सकता था |
 
मेरे दो बेटों को खतना करने को लेकर परिवार में विवाद हुआ मैं दोनों की खतना नहीं करी | जिसमें आज एक बेटा तो गाजियाबाद सन्यांस आश्रम में आचार्य है, एक अपना नौकरी करता है सब गुरुकुल में पढ़े हैं |
 
इस पढाई में नॉएडा 33 सेक्टर के गुरुकुल के आचार्य जयेन्द्र ने मेरे एक बेटे को उसने या उसकी पत्नी ने क्या कुछ कह दिया जिस पर उसने विष पीने को मजबूर हुआ | मुझे फोनपर जयेन्द्र ने काहा कुछ पी लिया नरसिंह होम में भरती किया है आप आकर इन्हें ले जाएँ |
 
मैंने जयेंद्र पर कोई दोष नहीं लगा कर बच्चे दोनों को घर ले आया यह है आर्य समाज का चरित्र | कुछ लोग मुझपर शादी करने का दोष लगा ते हैं इन दोष लगा ने वालों से पूछता हु शादी न कर दोनों बेटे की सुन्नत करना ठीक था या शादी करना ?
 
पर यहाँ आर्य समाजियों में बड़े बड़े आचार्य और गुरुकुल के विदुषी कहलाने वालों को देखा खूब जहाँ चरित्र का च तक नहीं है मैं अनेकों का नाम जनता हूँ |
यहाँ भी प्रसंग बदल गया मुझे लिखना क्या था और कहाँ से कहाँ चक्कर लग गया | मैं यह बताना चाह रहा था की स्वामी अग्निवेश ने एक बार भारतीय आर्य प्रतिनिधि सभा बनाई थी |
यह धर्म पाल आर्षप्रचार साहित्य ट्रस्ट और क्रांति साबुन बनानेवाले जो इस समय दिल्ली सभा के प्रधान है यह स्वामी अग्निवेश से मिले हुए थे और भारतीय आर्य प्रतिनिधि अग्निवेश की सभा कार्यालय उनकी आर्य समाज नयाँ बाँस आर्य समाज में जगह दिया | अर्थात उनका कार्यालय इसी समाज में बनी थी |
 
जिस धर्म पाल को स्वामी अग्निवेश का विरोधी मान कर दिल्ली सभा में बैठाया गया जो राजसिंह उन्हें सभा में लाये उनके साथ यह धर्म पाल, विनय, और प्रकाश ने क्या व्यवहार किया मैं तो नेदरलैंड्स के महा सम्मेलन में विरोध करते देखा इस पर कभी लिखकर जान कारी दूंगा आप लोगों को |
जिस विनय, धर्म पाल को अग्निवेश का विरोधी माना जाता है यह आर्यों की भूल है इस लिए यह बातें मैंने आप लोगों को याद दिलाई | आज यही तक आगे फिर कभी लिखेंगे = महेन्द्र पाल आर्य – 2 /8/20 22

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