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कुरानी अल्लाह का न्याय देखें ||

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कुरानी अल्लाह का न्याय देखें ||
अर्थ :- (हे नबी!) कहोः हे अल्लाह! राज्य के अधिपति (स्वामी)! तू जिसे चाहे, राज्य दे और जिससे चाहे, राज्य छीन ले तथा जिसे चाहे, सम्मान दे और जिसे चाहे, अपमान दे। तेरे ही हाथ में भलाई है। निःसंदेह तू जो चाहे, कर सकता है। 3,26
मानव कहलाने वालों को अल्लाह कि इन्साफ पर जरुर विचार करना होगा |

अल्लाह अपने नबी से कह रहे हैं, कहो अल्लाह राज्य के अधिपति हैं वह जिसे चाहे राज्य दे और जिससे चाहें राज्य छीन लें | और जिसे चाहें सम्मान दें और जिससे चाहे सम्मान छीन लें, निः सन्देह वह जो चाहे कर सकते हैं,यह अल्लाह का न्याय कैसे ?
जिसे चाहे राज्य दें क्या राज्य पाने के लिए किसी को पुरषार्थ करने कि जरूरत नहीं होती ? और मजे कि बात जिससे चाहें राज्य छोन भी लें, क्या राज्य गंवाने के लिए उसका कोई कुकर्म नहीं होगा ? दुराचार के कारण राज्य हाथ से निकलना नहीं है ? यह तो दुनिया में ही दिख जाती है, अभी चीन को देखिये युक्रेन को देखिये |
फिर अल्लाह किसी को इज्जत देते है और किसी को बेइज्जत भी करते हैं क्या इज्जत पाने के लिए किसी काम कि जरूरत नहीं होती ? कोई इज्जत वाला काम करे तो उसकी इज्जत होगी | और कोई बेइज्जती वाली काम करे तो उसकी बेइज्जती होगी, इसमें अल्लाह का क्या हाथ होना कहां सम्भव हो रहा है ? तो क्या अल्लाह के पास यही न्याय है तो दुनिया के लोग अन्याय किसे कहेंगे ?
महेन्द्र पाल आर्य 28/12/22

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