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कुरान का कहना है धरती पर पेढ़ अल्लाह ने लगाईं ||

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कुरान का कहना है धरती पर पेड़ अल्लाह ने लगाई |
भला यह मानव कृत कार्य अल्लाह क्यों और कैसे कर सकते हैं ?
परमात्मा ने काम अलग अलग बताया मानव कृत कार्य करना यह मर्यादा के विपरीत हैं, परमात्मा के शान के खिलाफ हैं |
और परमात्मा कृत कार्य मानव नहीं कर सकता, काम दोनों का अलग अलग है पर अल्लाह धरती पर पेड़ लगते हैं बगीचा भी लगते हैं | देखें कुरान का उपदेश |
इस प्रकार सृष्टि नियम विरुद्ध कार्य मानव का होना यही तो अमानवीय है जो मानवता विरुद्ध है आत्मवत सर्व भूतेशु कहा है की जो अपने आत्मा के समान सभी आत्मा को समझे जैसा अपना आत्मा है हमें चुटी काटने से हमें चोट लगती है इसी प्रकार हम भी किसी को चुंटी न काटें जैसे हमें चोट लगती है ठीक उसी प्रकार उसे भी चोट लगती है | यही शिक्षा धर्म का है मजहब में यह शिक्षा नहीं मज़हब में तो पशु काट कर खाने की बात की गई है, जो मानवता पर ही कुठाराघात है | यही सब भेद है धर्म में और मजहब में अल्लाह तथा ईश्वर में जिसे मानव कहला कर भी लोग नहीं जान सके |
हमें मानव कहलाने के लिए धर्म और मजहब को जानना जरूरी है कारण मानवों के लिए ही धर्म है किसी और के लिए नहीं, मानव ही केवल समझ सकता है जान सकता है धर्म को यह कारण बताया मानवों में और जीवजन्तु में भेद क्या है ? हम मानव कहलाने के अधिकारी तभी बन सकते हैं जब इस भेद को हम जान जायेंगे और उसपर अमल भी करेंगे |
इसी लिए कहा गया है धर्मेंन हीना पशुर्भी समानः | अर्थात धर्म हींन मानव पशुके समान है, अब हमें अपने आप में यह विचार करना होगा की जब हम मानव बनकर आये हैं तो हमें इस से ऊपर उठना चाहिए | की हम काम ऐसा कर चलें की हमें देवत्व प्राप्त हो मानव से हम ऊपर उठें मानव से ऊपर देवता है | और अगर यह मानव गिरा मानवता से तो उसी का ही नाम राक्षस है,अब हमें खुद ही निर्णय लेना हो गा |
की हमें बनना क्या हैं मानव या फिर दांनव यह हमारे हाथ में है हम क्या बनें || परन्तु कुरान में यह बातें नहीं है देखें >
أَمَّنْ خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَنۢبَتْنَا بِهِۦ حَدَآئِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍۢ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنۢبِتُوا۟ شَجَرَهَآ ۗ أَءِلَـٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌۭ يَعْدِلُونَ ٦٠
بھلا کون ہے جس نے پیدا کیا آسمانوں اور زمین کو اور آسمان سے تمہارے لیے پانی اتارا پھر اس کے ذریعے سے ہم نے ُ پررونق باغات اگائے تمہارے لیے ممکن نہیں تھا کہ ان کے درختوں کو خود اگا سکتے کیا کوئی اور معبود بھی ہے اللہ کے ساتھ بلکہ یہ ایسے لوگ ہیں جو (حق سے) انحراف کر رہے ہیں
ये वो है, जिसने उत्पत्ति की है आकाशों तथा धरती की और उतारा है तुम्हारे लिए आकाश से जल, फिर हमने उगा दिया उसके द्वारा भव्य बाग़, तुम्हारे बस में न था कि उगा देते उसके वृक्ष, तो क्या कोई पूज्य है अल्लाह के साथ? बल्कि यही लोग (सत्य से) कतरा रहे हैं। 27/60
यह सूरा 27 अन नमल आयात 60 का अर्थ:- भला बतलाव तो के आसमानों और जमीन को किसने पैदा किया ? किसने आसमान से बारिश बरसाई ? फिर उससे हरे भरे बारौनक बागात उगा दिए ? उन बागों के दरख्तों को तुम हरगिज न उगा सकते क्या अल्लाह के साथ और कोई माबूद भी है ? बल्कि यह लोग अल्लाह की बराबरी का औरों को ठहराते हैं | महेन्द्र पाल आर्य 27/8/22

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