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कुरान को कला मुल्लाह कहना उचित क्यों और कैसे ?

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कुरान को कला मुल्ला कहना उचित क्यों और कैसे ?

أَوَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ
يُؤْمِنُونَ [٣٩:٥٢]
لَهُ مَقَالِيدُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ يَبْسُطُ الرِّزْقَ لِمَن يَشَاءُ وَيَقْدِرُ ۚ إِنَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ [٤٢:١٢]

अर्थ:- और क्या इन्हें मालूम नहीं कि अल्लाह जिसको चाहता है खूब देता है, और
जिसको नहीं चाहता नहीं देता है | 39/52 यह बातें भी अल्लाह की नहीं है दूसरा कोई कह रहा है की अल्लाह जिसे चाहे, अगर यह कलाम अल्लाह की हो तो मैं जिसे चाहता होना चाहिए था | आगे और देखें

अर्थ:- जिसे चाहता खुला रिजक देता, और जिसे चाहे नपा तुला देता | 42/12 इस प्रकार सम्पूर्ण कुरान को अगर छानबीन के साथ पढ़ी जाये हर जगह यही देखने को मिलेगा की यह कुरान का कहने वाला अल्लाह नहीं कोई और है | इससे यह पता लगा कि मुसलमानों को अल्लाह ने कुरान के माध्यम से यह बताया है की इसमें जो बताया गया है उसे सही और सत्य मानने वाला ही ईमानदार कहलाएगा |
जो लोग इसे झुठलाते हैं वे जहन्नुमी है, किसी भी प्रकार इसपर संदेह करना वाला बेईमान कहलायेगा | अत: इसमें जो कुछ भी लिखकर बताया गया है उसे बर हक़ मानना यही ईमान है अब यह बातें अल्लाह की हो, किसी और की यह विचार नहीं करना है जो बोला गया इसमें वही सत्य है, भले ही वे शक के दायरे में हो उसपर शक नहीं करना है | और अगर शक किया तो इसमें से हाथ धो बैठे | दूसरी बात एक और भी है अब तक आप लोगों ने यह भी देखा की अनेक बार कहा गया है अल्लाह जो चाहता है करता है वह जो चाहेगा वही होगा आदि |

फिर अल्लाह को मुसलमानों से यह कहने की जरूरत क्यों पड़ी की गैर मुस्लिमों से लड़ो ? क्या अल्लाह उन गैर मुस्लिमों से दुनिया को खाली नहीं कर सकते ? आज विशेष कर भारत भर में देखने को मिल रहा है हर मुसलमान यह प्रयास में लगा है की इस भारत वर्ष को इस्लामिक राष्ट्र कैसे बनाये जाएँ ? इस पर विभन्न संगठन कार्य में जुटे हैं कि 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाया जाय | तो इसमें बहुत लोग पकडे भी जा रहे हैं और अनेक लोग अभी भी गिरिफ्त में नहीं आये, तो मुसलमानों का यह जी तोड़ मेहनत में अल्लाह का सहयोग क्यों नहीं ? महेन्द्र पाल आर्य =15/12/22

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