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कुरान में लिखे किस्से को देखें ||

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कुरान में लिखे किस्से को देखें ||
यह प्रमाण इबने कसीर हिन्दी भाष्य पेज 339,340, परा 23,सूरा38, साद आयात 17,18,19,20, का सन्दर्भ = इन आयातों में अल्लाह ने अपने पैगम्बर हजरत दाउद की चर्चा की है उनके गुणों को बताया है की वह रात के समय नमाजे तहज्जुत पढ़ा करते थे एक दिन रोजा रखते थे और एक दिन रात नमाज पढ़ते थे, फिर लिखा रात को नमाज पढ़ते थे दिनमें रोजा रखते थे | कुरान की इस किस्से में यह बातें बताई गई है की अल्लाह ने पहाड़ों को भी तस्बीह करने और परिंदों को भी तस्बीह करने का हुकुम दिया था |
और हजरत दाऊद जब तौरैत पढ़ते थे तो परिंदा सब एकत्र हो कर सुनते थे उनकी पढ़ना | कुरान की इन किस्सों में कहाँ तक सच्चाई है यह विचार तो पढ़े लिखे लोगों को ही करना है की पहाड़ एक जड़ वस्तु है उसका तसबीह करना या इबादत करना कैसा सम्भव है ? फिर परिंदों का तस्बीह भी कैसा सम्भव है ? और किसी के तौरैत पढने से उन परिंदों का काया मतलब ? क्या वह परिंदे भी जानते हैं की कोई व्यक्ति क्या पढ़ रहा है उसे सुनें ?
अगर इबने कसीर के लेखक की यह बात सच है तो उस तौरैत काल में अगर परिंदों के बैठकर उसे सुनना पसंद था तो इस कुरानी काल में किसी के कुरान के पाठ पर कोई परिंदा बैठकर कुरान की पाठ को क्यों नहीं सुनता ? अगर कहीं भी सुनता होता तो कुरान में उसकी भी चर्चा होती कहीं ? जब की सब किताब से कुरान की अहमियत सबसे ज्यादा है | तो अल्लाह का हुकुम उन परिंदों के लिए क्यों नहीं है ? या फिर उन दिनों में पहाड़ों को अल्लाह हुकुम दिया था तसबीह व तहलील करने के लिए तो आज भी पहाड़ों को तस्बीह करना चाहिए था|

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