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कौमे हूद की किस्सा क्या है कुरान में देखें ||जो रसूल को न माने अल्लाह उसके साथ क्या करते हैं ||

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यह प्रमाण इबने कसीर हिन्दी भाष्य जिल्द 6 पेज 207,208,पारा 27 सूरा 54,कमरआयात 18,19,20,21,22,का सन्दर्भ = अल्लाह ताला खबर देता है की कौमे हुद ने भी अल्लाह के रसूल को झूठा कहा और बिलकुल कौमे नुह की तरह दुष्टता पर उतर आये | तो उनपर सख्त घातक हवाएं चलती रही और उन्हें तबाह व बर्बाद करती रही |और उन्हें आखिरत की आजाब में गिरिफ्तार कर लिए गये | हवा की झोंका आता और उनमें से किसी किसी को उठा कर ले जाता, यहाँ तक की जमीन वालों की निगाहों से वह दूर चला जाता | फिर उसे जमींन पर ओंधेमुह फेंक देता, सर कुचल जाता भेजा निकल पड़ता, सर अलग धड अलग ऐसा मालूम होता जैसा खजूर के पेड़ बिना सर के ठुड है, देखा मेरा आजाब कैसे हुआ?      मैं तो उस कुरान को आसान कर दिया जो चाहे नसीहत हासिल करे |   तो आप लोगों ने देखा की अल्लाह कौन है और अल्लाह का काम क्या है ? जो लोग अल्लाह के पैगम्बर की बात नहीं मानते हैं अल्लाह उन्हें तरह तरह के आजाब देते हैं | अज़ाब भी उन्हीं अल्लाह का है जिन्हें रहमान और रहीम भी कहा है कुरान ने अर्थात वह दयालु है और महरबान भी है | जो अल्लाह किसी को पानी में डुबो रहे हों जो अल्लाह ठंडी हवा चलवाकर लोगों को ऊपर उठाकर पटक रहे हों और भेजा अलग हो रहे हों और किसी किसी के गर्दन से सर अलग हो रहे हों यही तो लिखा है इन आयातों के सन्दर्भ में | अब तो दुनिया वालों को सोचना होगा की अगर अल्लाह का यह निष्ठुरता वाला काम दया है तो,अगर निष्ठुरता पर अल्लाह उतर आयें तो वह किस प्रकार का हो सकता है यह जरुर जानना होगा |

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