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 खैरात में मिली संपत्ति आर्य समाजियों के दुरूपयोग से क्या मतलब ?

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खैरात में मिली संपत्ति आर्य समाजियों के दुरूपयोग से क्या मतलब ?

धन्यवाद दीजिये ऋषि दयानन्द जी को जबसे उनके मन में असली शिव का प्रश्न आया और कौन है वह असली शिव इसे जानने के लिए माता,पिता, भाई बहन अपनों को छोड़ा यहाँ तक की घर का सारा वैभव को भी तिलांजली दिया न जाने किन किन, और कैसे कैसे मुसीबतों को झेला |

भूख प्यास सर्दी गर्मी को सहन करते हुए किन किन मुसीबतों का सामना किया, लोगों के दिए यातना को भी सहा यहाँ तक की अनेक बार लोगों के दिए गये विष को भी पान करना पड़ा | उनकी साधना और तपस्या को देखते हैं तो उसमें भी कितनी कठनाइयों से गुजरते हुए आर्य समाज की स्थापना की और वेद को जन जन तक पहुंचाकर मानव मात्र का कल्याण किया, उनकी जीवनी से हमें पता चलता है इन सभी बातों का | मैं उन सभी आपदाओं  और उनके झेले गए मुसीबतों को या उनकी जीवनी लिखने नहीं बैठा |

मैं उनलोगों के लिए लिख रहा हूँ जिन्हें यह आर्य समाज खैरात में मिली हो वह ऋषि के बनाई संस्था के मर्यादा को क्या जानें ? उन्हें तो खैरात में मिली यह संस्था और उसकी संपत्ति से मतलब है | और आज देखेंगे आर्य समाज के नाम जो संपत्ति इन्हें खैरात में मिली है उसका दुरुपयोग किस प्रकार कर रहे हैं यह लोग उसका जीता जागता प्रमाण मैं आप लोगों तक पहुंचा दिया हूँ |

फिर भी याद दिलाता हूँ प्रमाण के लिए, पिछले 3 जुलाई 2022 रविवार के दिन बंगाल आर्य प्रतिनिधि सभा का चुनाव था आसनसोल DAV स्कुल में यहाँ दिल्ली से पधारे दिल्ली सभा मंत्री विनय आर्य | चुनाव कराने के लिए एक चुनाव अधिकारी को साथ लेकर आये थे जिन्होंने असंवैधानिक चुनाव कराया |   मैंने अपने फेसबुक पेज में उसी दिन पूरी घटना लिख कर आर्य जनों को जानकारी दी |

कुछ ही मिनटों में विनय आर्य का फोन मेरे पास आया, और बोला महाराज मैं तो उस चुनाव का अधिकारी नहीं था और न पर्यावेक्षक था आपने मेरा नाम लिखा ?  मैंने पूछा आप फिर किस लिए आये हवाई जहाज में बैठकर दिल्ली से कोलकाता किस लिए आये अपना फोटो खिंचवाने के लिए ?

आर्य लोगों इसका कोई जवाब उनके पास नहीं था, इसलिए मैं लिख रहा हूँ जिन्हें आर्य समाज खैरात में मिली हो वह ऋषि दयानन्द के त्याग तप और साधना व मुसीबत और कष्ट को क्या जानेंगे ?

यह तो खैरात में मिले धन को अपना पैत्रिक संपत्ति मान कर ही उड़ा  रहे हैं मैंने तो सिर्फ एक ही प्रमाण दिया बंगाल सभा चुनाव का | आज सम्पूर्ण जगत में यह लोग इसी प्रकार आर्य समाज की संपत्ति का दुरूपयोग कर रहे हैं सब मिलकर |

इन्हें तो खैरात में मिली है यह आर्यसमाज की संपत्ति इसके दुरूपयोग करने में इनका क्या जा रहा है यह तो इसे अपना अधिकार मानकर ही खैराती सामानों का उपयोग अपने लिए कर रहे हैं ? इन्हें तो परिश्रम करके संपत्ति बनाना नहीं पड़ा जब खैरात में मिली यह संपत्ति उसे खर्च करने में क्या जा रहा हैं ?

आज ऋषि दयानन्द जी के किये गये त्याग, तप, परिश्रम, मेहनत की कीमत यह लोग क्या जानेंगे ? यही कार्य हर आर्यसमाज और प्रतिनिधि सभाओं में चल रहा है क्योंकी उन्हें तो खैरात में ही मिली है यह संपत्ति |

महेंद्र पाल आर्य= 22/11/22

 

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