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जज अल्लाह खुद रसूल पर स्लैम व दरूद भेज ते हैं तो मुसलमानों की उधम मचाने की जरूरत क्या ?

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|| अल्लाह और फरिश्तों की नाकामी देखें ||

अल्लाह खुद रसूल पर दरूद भेजते हैं, तो मुसलमानों को उधम मचाने की जरूरत ही क्या है ?

दुनिया वालों देखें अल्लाह और फरिश्तों की दरूद भी कम पड़ गया, अपने पैगम्बरों के लिए | इसी लिए अल्लाह ने खुद कहा ईमानदारों को, की हमारी और फरिश्तों की दुवा में कमी रह गई, और हम नाकाम रहे |

ऐ ईमानदारों तुम भी दरूद भेजते रहो और बराबर सलाम करते रहो मेरे पैगम्बर को | यही कारण बना इस कुरान के धरती पर आने के बाद से आज तक हर मुसलमान अपनी पाँच बार की नमाज में –और,आजन के बाद व,किसी भी विशेष अवसर पर अपने रसूल या पैगम्बर पर दरूद भेजते हैं |

सवाल यह उठता है की जब अल्लाह ने खुद कहा की मैंने और हमारे फरिश्तों ने अपने पैगम्बर पर और उनके वंशजों पर दरूद यानि उनकी भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं | तो अल्लाह की बेजी गई दरूद में कमी रह गई, जो अल्लाह ईमानदारों से भी दरूद भेजने को कहा है कुरान के सूरा 33 –अहज़ाब =आयात 56 में देखें |

पता यह लगा की अल्लाह से मजबूत और वजन दार दुवा है ईनादारों की – तो महत्त्व अल्लाह की कहाँ रह गई ? अल्लाह ने खुद स्वीकारा है इस बात को और कहा भी है अपनी कुरान में- देखें जो हवाला दिया गया है |

إِنَّ اللَّهَ وَمَلَائِكَتَهُ يُصَلُّونَ عَلَى النَّبِيِّ ۚ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا صَلُّوا عَلَيْهِ وَسَلِّمُوا تَسْلِيمًا [٣٣:٥٦]

इसमें भी शक नहीं कि खुदा और उसके फरिश्ते पैग़म्बर (और उनकी आल) पर दुरूद भेजते हैं तो ऐ ईमानदारों तुम भी दुरूद भेजते रहो और बराबर सलाम करते रहो | 33 /का 56

 

इस्लाम जगत के आलिमों से जानने की प्रतीक्षा में महेन्द्र पाल आर्य अपनी टीम के सभी सदस्यों के साथ | 11 /जून / 22 =

 

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