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  दुनिया वालों जरा अल्लाह का काम क्या है उसे देखें ||

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दुनिया वालों जरा अल्लाह का काम क्या है उसे देखें ||

मानव समाज में कुरान को अल्लाह का दिया गया या भेजा गया आसमानी किताब मानते, और इस पर विशेष कर इस्लाम के मानने वाले दम भरते हैं की यह अल्लाह की किताब है दुनिया वालों के पास इसके मुकाबिल कोई किताब ही नहीं है,यह किताब ज्ञान और विज्ञान से भरी हुई है, दुनिया वालों के पास इस किताब का कोई मिसाल ही नहीं है | इस कुरान नामी किताब को अल्लाह का दिया आसमानी किताब ज्ञान वर्धक किताब मानते हैं इस्लाम के मानने वाले, इसमें जो कुछ भी बताई गई है उसे पत्थर की लकीर कहा जाता है और माना भी जाता है, कारण इस किताब की प्रथम में अल्लाह ने कहा इस किताब में कोई संदेह नहीं है, अथवा किसी भी प्रकार इस किताब पर संदेह न करो, शक न करो |

भले ही इस्लाम वालों की यह मान्यता हो,पर यह किताब संदेह के घेरे में ही है, इसे ध्यान से पढने से पता लगेगा, जैसा मैं आज एक प्रमाण प्रस्तुत कर रहा हूँ आप लोगों के सामने, इसी कुरान में अल्लाह ने क्या कहा है, और क्या किया है उसे आप लोग भी पढ़ें और विचार करें कि क्या यह किताब ईश्वरीय ज्ञान हो सकता है ?

وَيَا قَوْمِ هَٰذِهِ نَاقَةُ اللَّهِ لَكُمْ آيَةً فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِي أَرْضِ اللَّهِ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ قَرِيبٌ [١١:٦٤]

ऐ मेरी क़ौम ये ख़ुदा की (भेजी हुई) ऊँटनी है तुम्हारे वास्ते (मेरी नबूवत का) एक मौजिज़ा है तो इसको (उसके हाल पर) छोड़ दो कि ख़ुदा की ज़मीन में (जहाँ चाहे) खाए और उसे कोई तकलीफ न पहुँचाओ

فَعَقَرُوهَا فَقَالَ تَمَتَّعُوا فِي دَارِكُمْ ثَلَاثَةَ أَيَّامٍ ۖ ذَٰلِكَ وَعْدٌ غَيْرُ مَكْذُوبٍ [١١:٦٥]

(वरना) फिर तुम्हें फौरन ही (ख़ुदा का) अज़ाब ले डालेगा इस पर भी उन लोगों ने उसकी कूँचे काटकर (मार) डाला तब सालेह ने कहा अच्छा तीन दिन तक (और) अपने अपने घर में चैन (उड़ा लो)

فَلَمَّا جَاءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا صَالِحًا وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَمِنْ خِزْيِ يَوْمِئِذٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْقَوِيُّ الْعَزِيزُ [١١:٦٦]

यही ख़ुदा का वायदा है जो कभी झूठा नहीं होता फिर जब हमारा (अज़ाब का) हुक्म आ पहुँचा तो हमने सालेह और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे अपनी मेहरबानी से नजात दी और उस दिन की रुसवाई से बचा लिया इसमें शक़ नहीं कि तेरा परवरदिगार ज़बरदस्त ग़ालिब है | सूरा 11 /64,65,66,

 

मानव कहलाने वालों जिसे लोग अल्लाह कहते हैं, और दूनिया का बनाने वाला मालिक बताते हैं, उसी अल्लाह का क्या काम है उसे देखें | एक कौम जिसका नाम समुद है उसी कौम के लिए एक पैगम्बर को  सन्देश वाहक अल्लाह ने भेजा है जिनका नाम हजरत सालेह था | अल्लाह ने उसकी पहचान के लिए  एक ऊँटनी भेजा और यह उपदेश दिया की इसे किसी भी प्रकार से कोई तकलीफ नही पहुंचाना | इसी जमींन में चरने दो कोई कष्ट इसे न पहुंचाना | अगर ऐसा किया तो सब को अल्लाह का दिया दण्ड भोगना पड़ेगा, आजब भोगना पड़ेगा |

 

इसके बाद भी लोगों ने उस ऊँटनी की टाँगे काट कर मार डाला उसे, तब अल्लाह के पैगम्बर ने लोगों से कहा, बस तुम लोग तीन दिन ही अपने घर में मौज मस्ती करलो, यही खुदा का वादा है जो कभी झूठा नहीं होता | तुम लोगों पर अल्लाह का अजाब दण्ड होगा | और जो लोग हजरत सालेह पैगम्बर पर ईमान लाये उन्हें अल्लाह ने बचा लिया, बाकि सब को ख़तम कर दिया | इसमें कोई शक नहीं की परवर दिगार जबर दस्त है, शक्ति शाली है |

 

सवाल यह है मानव मात्र के लिए, जिसे मैं आप लोगों को बताना चाहता हूँ वह यह हैं, की अल्लाह ने ऊँटनी भेजी यह रहती कहाँ थी जहाँ से भेजी गई ? अगर जवाब मिले जन्नत से, तो क्या जन्नत जानवरों का आराम गाह है जहाँ से अल्लाह ने भेजी ?

 

दूसरी बात यह भी बताना चाहूँगा आप लोगों को, की जो ऊँटनी अल्लाह की भेजी हुई हो उसे कुछ लोगों ने मार दिया हो, उस ऊँटनी को बचाने में अल्लाह असमर्थ क्यों ?

 

और हजरत सालेह पैगम्बर के साथ जो लोग ईमान लाये उन्हें अल्लाह ने बचा लिया पर अल्लाह की ही भेजी गई ऊँटनी को नहीं बचा पाना क्या यह अल्लाह की नाकामी मानी जाय ?

 

तीसरी बात यह भी है की क्या अल्लाह का यही काम है की ऊँटनी भेज कर मानव समाज में अल्लाह होने का परिचय दे ? इसी किताब को लोग क्लामुल्लाह आसमानी, अल्लाह की भेजी गई किताब मानते हैं | जिस किताब में यह किस्सा लिखी और बताई गई है |  इस किताब में ज्ञान की कौन सी बातें आप लोग पढ़ रहे हैं ? या इस किस्से में कौन सी ज्ञान की पातें आप लोगों को मिला है ? यही है अल्लाह की किस्सा वाली किताब, जिस पर बड़ी बड़ी बातें कही जाती है सुनाई जाती है | अब मानव कहलाने वालों को निर्णय लेना पड़ेगा की क्या यही अल्लाह की दिया ज्ञान की किताब है ? जिसपर लोग कूदते भी न थकते – इस ऊँटनी की कहानी से अल्लाह दुनिया वालों को क्या सन्देश देना चाहते हैं अल्लाह ? और मानव समाज का क्या कल्याण हो रहा है इस किस्से से ?  = महेन्द्रपाल आर्य = 1/10/22=

 

 

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