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                देश का मुखिया प्रधान मंत्री, प्रान्तों के मुखिया मुख्यमंत्री ||

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देश का मुखिया प्रधान मंत्री, प्रान्तों के मुखिया मुख्यमंत्री ||

स्वदेशे पूज्यते राजा, अर्थात किसी भी देश के प्रधानमंत्री जी को सम्पूर्ण देश वासियों के लिए पूजनीय है   सम्पूर्ण देश एक मुखिया चुनते हैं, पूरा प्रान्त एक मुख्यमंत्री, पुरे अन्चल में एक अन्चल प्रधान चुनते हैं, एक ग्राम में एक ग्रामप्रधान चुना जाता है, एक कालेज में एक प्रिन्सीपल होते हैं, एक स्कुल में एक हेड मास्टर होते हैं, ठीक इसी प्रकार एक परिवार में हेडऑफ़दा फेमिली एक ही होते है आदि |

इसमें अगर हर कोई हर जगह प्रधान होने लगे कहने लगे अथवा कोई बनाने लगे, तो कहीं भी व्यवस्था सही रहने वाला नहीं होगा | यह एक प्रधान किस लिए बनाया जाता है ? की सारा दायित्व का निर्वाहण की जिम्मेदारी उन्ही पर होती है और इसी लिए सब जगह सभी प्रधान किसी जिम्मेदार व्यक्ति को ही चुनते हैं |

अगर प्रधान कोई गैर जिम्मेदार हो तो घर परिवार से लेकर अन्चल, और प्रान्त से लेकर सम्पूर्ण राष्ट्र बर्बाद या समाप्त हो जाता है | प्रमाण हमारे सामने है पाकिस्तान को ही हम ले सकते हैं |

परन्तु मैं अपने भारत का ही बात करूँगा, जो देश के प्रधान मंत्री होते हैं, वह किसी प्रान्त और किसी वर्ग के नहीं अपितु सम्पूर्ण देश के वह मुखिया होने हेतू देश की उन्नति कैसी हो हमारा देश तरकी कैसे करे देश के लोग किस प्रकार सुखी और संपन्न हो सके उन्हें यह चिंता लगी रहती है |

आज के समय एक परिबार का मुखिया के घर चलाने में न मालूम किन किन बातों का ध्यान रखना पड़ता है, अर्थात घर के सभी सदस्यों को देख कर चलना पड़ता है या घर को चलाना पड़ता है |

ठीक इसी प्रकार की जिम्मेदारी एक ग्राम प्रधान का है, और एक अन्चल प्रधान का भी दायित्व बनता है पुरे अन्चल वालों की,सुखी और संपन्न बनाना | यही प्रमाण एक प्रान्त के मुख्यमंत्री का भी है की प्रान्त वासियों की तरक्की उन्नति खुशहाली की होती है |  देश के प्रधान मंत्री भी यही चाहते हैं की हमारे देश के लोग स्वस्थ रहें निरोग रहें विकाश शील बने आदि  |

अब हम भारतवासी आज तक यह नहीं जान पाए की देश के जो प्रधानमंत्री है, उन्हें किसी प्रांतीय मुख्यमंत्री यह कहे की हम इन्हें प्रधान मंत्री नहीं मानते है, तो यह देश का दुर्भाग्य ही कहा जायेगा, मात्र इतना ही नहीं देश के प्रधानमंत्री को कोई बाहरी बताएं वह भी प्रान्त के मुख्यमंत्री,” तो इससे बड़ा दुर्भाग्य प्रान्तवासियों का नहीं तो और किनका है ?

एक राष्ट्रिय पार्टी के अध्यक्ष को अपने देश के किसी प्रान्त के मुख्यमंत्री द्वारा उपहास किया जाना यह कौन सी मर्यादा की बात है ? और ऐसे मुख्यमंत्री के पीछे जो लोग नाच रहे हैं उन्हें भी मानवता नाम की मर्यादा नाम की कोई आभास है या नहीं यह तो सोचने और समझने की बात है |

सबसे बड़ी बात यह है की यह सभी घटनाएँ उस प्रान्त की है या उस प्रान्त में हो रही है जिस प्रान्त का नाम इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा हो ? विद्या में कला में संस्कृति, लेखनी और राष्ट्र गान, राष्ट्रिय गीत लिखने वालों का जन्म जिस प्रनत में हुवा हो,और अनेक शूरवीरों का नाम भी जहाँ सबसे अग्रणी हों | कारण इस भारतवर्ष में अगर नेता जी किसी का नाम पड़ा अथवा धरती के लोगों ने नेताजी कहकर किसी को बुलाया तो वह मात्र बंगाल प्रान्त के ही सुभाषचन्द्र बोस का ही एक मात्र नाम आता है इतिहास में   |

ऐसे नेता जी का 125 जन्म वर्ष गाँठ मानाने के लिए देश के मुखिया प्रधानमंत्री जहाँ पहूँच रहे हों, तो उस प्रान्त के मुखिया अपने प्रान्त वासियों को लेकर उनके स्वागत करने के बजाय अपना रोड शो करने में व्यस्तता दिखाने लगी यह कौन सी मर्यादा की बात थी ? अपने प्रान्त वासियों को लेकर प्रधानमंत्री जी के अप्पायन में लगने के बजाय उनके सामने या उनके आगमन में स्वागत के बजाय अपने को वहां से दूर रखना क्या यह प्रधान मंत्री जी का अनादर नहीं ?

और अगर जयश्रीराम का नारा माननीय मुख्यमंत्री जी अपना अपमान समझती है, तो उन्हें भी तो चाहिए था की प्रधान मंत्री जी के सम्मान में उनके साथ प्रथम से आव भगत में अपनी तत्परता दिखाना, क्या यह अनुचित होता अथवा मुख्यमंत्री अपनी मर्यादा गँवा देती ?

जय श्रीराम के नारा को अपना अपमान समझना,क्या यह भारत जैसे हिन्दू बाहुल्य देश का अपमान नहीं है? वह भी एक ब्राह्मण कन्या होकर मर्यादा पुरुषोत्तम का नाम लेना अपना अपमान समझें वह भी एक प्रान्त के मुख्यमंत्री के लिए यह तो देश का ही दुर्भाग्य कहा जायगा |

अगर प्रधानमंत्री बाहर के हैं BJP पार्टी बाहर का है तो इस देश में उन्हें चुनाव लड़ने का अधिकार छीन लेना चाहिए ? क्या यह ताकत भारत के किसी भी प्रान्त के मुख्यमंत्री में है यह क्षमता की उन्हें चुनाव लड़ने से रोक सकती हैं ? जिन्हें आप बाहरी बताने लगीं है तो आप भी अपने प्रान्त से MP बना कर उसी लोक सभा में भेजेंगी तो क्या दुसरे प्रान्तों से आये हुए MP गण बंगाल के MP को बाहरी बोलेंगे ?

यह सब तो लोकाचार की बात है, तो क्या एक प्रान्त के मुख्यमंत्री होकर भी आप को इंतनी सी बातों की जानकारी नहीं होनी चाहिए थी ? जब आप की यही दशा है, तो आपके साथ घुमने वालों की दशा क्या होगी यह तो दुनिया देख रही है, कभी माता सीता के नाम से अपशब्द बोल रहे हैं तो कोई महिलाओं के मर्यादा में असभ्य टिप्पणियाँ कर रहे हैं |

आप को चाहिए था माननीय प्रधान मंत्री जी के सामने अपनी बंगाल का गौरव गाथा सुनाना, बंगाल को अंगरेजों ने अपना राजधानी किस लिए चुना था उसे ही बताना की बंगाल की खूबी क्या है यही सुना देना था | यह कुछ भी न कर द्वेष पाल लिया ईर्षा मनमें होने से बंगाल के लोग भी आहत हुए | मेरे इन विचारों को ध्यान से पड़ने की कृपा जरुर करें देशवासियों =                          धन्यवाद के साथ -महेन्द्रपाल आर्य = 25 /1 /21 =

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