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न्याय सुनकर न्यायलय से विश्वास ख़तम ||

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न्याय सुनकर न्यायलय से विश्वास ख़तम ||
 
पिडीतों को न्याय देने के बजाय फटकार मिले तो फिर मई लार्ड किन्हें कहें ?
क्या लोड के पास अंधेर होना सम्भव है ? जिन्हें हम ईश्वर कह कर संबोधित कर रहे हैं अगर वेह हमें न्याय देने के बजाय तिरस्कृत करें तो और कौन है इन मानवों का सुनने वाला विशेष कर भारत में ?
 
मय लौर्ड ने याचिका कर्ता के याचना पत्र को बिना पढ़े ही फैसला सुना दिया | क्या इसे न्याय कहा जायगा ? पत्र में कहा क्या गया और फैसला क्या सुना रहे ? यह कहावत तो ऐसी हो गई की गये थे नमाज छुड़ाने ऊपर से रोजा गले पड़ गया |
न्यायधीश को फटकार ही लगाना था तो उन्हें लगाते जिनके कारण यह घटना घटी वह व्यक्ति कौन है जिसने हिन्दू देवी देवता को बुराभला कहा उसपर मय लार्ड कुछ क्यों नहीं बोले ?
फटकार जिन्हें लगाई गई अगर उनके कुछ कहने से उदय पुर घटना घटी, जब यह ब्यान उनका नहीं आया था उससे वर्षों पहले उदयपुर घटना को अंजाम देने के लिए हथियार कैसे बने ?
 
उसी हथियार को दिखाया जा रहा है प्रधान मंत्री जी के गला काटने के लिए, क्या इसके लिए भी यह बयांन दोषी है ?
न्यायधीश को न्याय संगत फैसला देना था तो पहले तस्लीम रहमानी को दोषी ठहराते जिसके कारण यह सब घटना घटी है ?
 
दोषी को सजा सुनाने की बात जिनसे न हो वेह म्यलार्ड कसे ? जिनके पास न्याय अन्याय नाम की कोई बात ही न हो वेह म्यलार्ड कैसे ? आज भारत के लोगों का म्यलार्ड से विश्वास उठ गया उनके बयाँन सुन कर |
 
न जाने भारत के हिन्दुओं का रक्षक कौन है किनके पास यह गुहार लगाने जाएँ ? क्या सरकार के पास न्याय संगत कोई उपाय है जिससे हिन्दुओं को न्याय मिल सके ?

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