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परमात्मा स्वगुण और निर्गुण भी है |

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परमात्मा स्वगुण और निर्गुण भी हैं |
श्री या: यश्चोकार- जो श्री है वही ओ३म है।
(74) लक्ष्मी- परमात्मा का नाम। लक्ष्मी जिसमें गुण ही गुण हों।
(75) सरस्वती- ईश्वर ही विद्यायुक्त है।
(76) सर्वशक्तिमान- विना किसी का सहयोग लिये कार्य को अन्जाम देने वाला ।
(77) निर्गुण- गुण रहित- जो गुण उसमें नहीं हैं- अल्पज्ञता का गुण उसमें नहीं है। मानव कृत गुण नहीं है।
(78) सगुण-गुण सहित- जो गुण उसमें हैं और किसी में न होना, जैसे सृष्टि की रचना करना, स्थिति में लाना -प्रलय करना ।
(79) अन्तर्यामी- अन्यों के हृदयों की इच्छाओं को जानने वाला।
(80) धर्मराज-अध्यक्षं धर्मणामिमम (ऋ.) धर्म के अध्यक्ष परमात्मा की हम सब स्तुति करते हैं।
दुनिया वालों ने स्वगुण और निर्गुण का मतलब साकार और निराकार मानते हैं जो गलत है | महेन्द्र पाल आर्य =2/1/23

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