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पुराने लोगों कि कहावत कितना सठीक है ||

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पुराने लोगों कि कहावत कितना सठीक है ||
आज सम्पूर्ण भारत के हिन्दीभाषी इलाके में रावण दहन का कार्यक्रम चल रहा है.बिहार से लेकर दिल्ली तक यह कार्य क्रम विभिन्न टीवी चेनलों में भी लोग टकटकी लगा कर देख रहे हैं | और हर पंडालों में बड़ी भीड़ है और रावण का दहन लोग देख रहे हैं | भाइयों यह मत समझना कि आज ही पहली बार यह काम हो रहा है, बल्कि यह काम हिन्दू घराने के लोग प्रति वर्ष करते हैं पहले इतना नहीं था जितना कि आज हो रहा है | हिन्दू घराने के लोग इसे त्यौहार के रूप में मनाते हैं और सब जगह मेला लगता है या लगाते हैं |
न जाने यह हिन्दू रावण को कब से जला रहे हैं या जलाते आ रहे हैं, भले ही यह रावण को जला रहे होंगे लेकिन अगले साल फिर रावण तैयार | परन्तु सुनने और देखने में तो यही आया कि रावण को जला दिया गया या जलाकर मारा था इन्हीं हिन्दुओं ने ? तो फिर अगले साल फिर रावण कहाँ से आगया ? क्या इन हिन्दुओं ने रावण को जलाया नहीं था ? अगर जलाया तो फिर अगले साल तैयार कैसे हो गया रावण ?
सही पूछिये तो यह राबण जलाना तो हिन्दुओं का दिखावा है, असली रावण तो इनके दिल में बैठा हुआ है जिसे आज तक हिन्दु मार ही नहीं पाये | असली रावण को यह मारना कहाँ चाहते हैं यह तो लोगों के नुमयेशी रावण को जलाते हैं | मन में जो रावण है उसे कहाँ मार पाया, असली रावण प्रत्येक मानवों के मन में बसा हुवा है | वह रावण हैं राग द्वेष हिंसा मन में गंदे विचार रूपी रावण उसे कोई इंसान मारना नहीं चाहता, उस असली रावण को अगर लोग मार देते तो आज यह धरती स्वर्ग बन गया होता |
यह मत समझना कि केवल हिन्दू ही इस काम को करते हैं रावण जलाते हैं, मुसलमान भी इसी काम को करते आ रहे हैं, जब से इस्लाम का जन्म हुआ उसी समय से | यह भी हर वर्ष शैतान को कंकड़ मारते हैं जो आज तक मार ही नहीं पाए | इस वर्ष मारा तो अगले साल फिर शैतान तैयार | यह इस्लाम के मानने वाले अगर हकीकी शैतान को मारते तो आज यह सर तन से जुदा वाला कार्यक्रम नहीं चलता | यह लोग भी दिखावा करते हैं जैसा छेदी लाल है, ठीक उसी प्रकार का सुरखी लाल कि कहावत को ही चरितार्थ कर रहे हैं यह लोग भी | मन में जो किना और बुग्ज मुसलमान लिए बैठे हैं जो शैतान अपने अन्दर पाले हुए हैं आज तक उसे कोई मुसलमान मारने का प्रयास ही नहीं किया और न कर रहे हैं |
आज इस विजया दशमी के दिन सब को प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि अपने अंदर जो रावण या शैतान हम पाल रहे हैं उसे समाप्त कर ही मानवता कि रक्षा कर सकते हैं | आज ही के दिन धर्म अधर्म पर विजय को प्राप्त किया, असुरों को नष्ट करके धर्म पर विजय प्राप्त किया था | हमें और आप मानव मात्र को चाहिए कि अपने अंदर जो शत्रु को हम पाल रहे हैं उसपर हमें विजय हासिल करना हैं |
तो आयें हम इस सच्चाई को जानें और अंदर जो बैठा है रावण कहिये या फिर शैतान हम उसे मारने का प्रयास करें जिससे मानव मात्र का भला हो सके |
महेन्र्ा पाल आर्य =5/10/22/ शुभ विजय दशमी के अबसर पर |

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