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बुखारी शरीफ हदीस से प्रमाण प्रस्तुत ||

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बुखारी शरीफ हदीस से प्रमाण प्रस्तुत ||
बुखारी शरीफ हदीस से किताबुन्निकाह में लिखा है अपने छोटे बच्चे का निकाह कर देना | इर्शदे रब्बानी है – और वह औरतें जिनको अच्छी हयेज {स्राब} नहीं आया -पस निकाह होने से पहले इद्दत तीन महीने हैं |
 
अर्दा बिन जुबैर ने हजरत आयशा सिद्दिका रज़िअल्लहु यन्हा से रवायत की है केह जब मैं नबी करीम {स} से निकाह किया तो उनकी यूमर 6 साल थी
जब उनसे खुलुत की गई तो 9 साल थीं और वह आप के के पास 9 साल रहीं ||
 
यह बुखारी हदीस में लिखी है और हदीसों में भी है | आज जो लोग इसे लेकर भारत को अस्थिर कर रहे हैं नुपुर शर्मा और जिंदल को फिरिफ्तार करने को कह रहे हैं | उन्हें पहले यह प्रमाणित करना पड़ेगा की उनके महापुरुष ने यह काम किया अथवा नहीं ?
अगर किया तो उन मुसलमानों को पश्चाताप करना चाहिए और दुनिया वालों के सामने उन्हें बताना चाहिए की उन महा पुरुष की जीवन की यह घटना हैं अथवा नहीं ?
जिन बात पर लोगों को शर्म आना चाहिए वेह उल्टा सीना जोरी कर रहे हैं यह कौन सी मानवता की बात हुई ? अगर यह घटना सत्य है तो दूसरों को दोष किस लिए दे रहे हैं ? दुनिया वालों से जिन्हें माफ़ी मांगना चाहिए वही औरों को आँखें दिखा रहे हैं |

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