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भारतीय मुसलमान समझदार नहीं |

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भारत के मुसलमान समझदार नहीं ||
सही में अगर भारत के मुसलमान समझदार होते तो जब पहली बार गायक सोनू निगम ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी तो प्रत्येक मुस्लिम संगठनों के अधिकारीयों को बैठ कर इस पर विचार कर लेना चाहिए था | की जब इसके विरोध में किसी ने आवाज उठाई है तो इसे हमें अपने आप ही बंद कर देना चाहिए, ताकि विवाद आगे न बढे |
जब दूसरी बार विरोध हुआ इलाहाबाद विश्व विद्यालय के उपाचार्य द्वारा उस समय भी संभल जाना चाहिए था की हकीकत में लोग इसे पसंद नहीं कर रहे हैं | एक तरफ सुप्रीम कौर्ट का आदेश भी है माइक नहीं बजने का उसकी अवहेलना कर के हमलोग जबरदस्ती लोगों के कान में ठूंस रहे हैं यह समझदारी मुसलमानों के पास नहीं है | हठ और दुराग्रह को पाल कर भारतीय मुस्लमान सीना जोरी कर रहे हैं |
अगर यह आवाज उनदिनों में बंद हुई होती तो आज यह हनुमान चालीसा को माइक लगाकर हिन्दू बोंलने को मजबूर न होते ? हिन्दुओं को कट्टर वादिता तो मुसलमानों ने सिखाया है, जब मुसलमान माइक बजाना बंद नहीं करेंगे और सड़क घेर कर नमाज पढेंगे तो कभी न कभी हिन्दू तो जागेगा भले ही यह कुम्भकरण के वशज हो तो आखिर 6 महीने के बाद भी तो उठेगा ही |
आज सम्पूर्ण भारत भर में जो यह आजन के विरोध में हनुमान चालीसा पढ़ी जा रही है इसके लिए दोषी कौन ? महाराष्ट्र होते हुए अब तो भारत के हर प्रान्तों में यहाँ तक की अलिगढ जैसी शहरों में जोरों पर यह विवाद होने लगा है | उसपर भी सीनाजोरी कर रहे हैं एक मुस्लिम संगठन का मुखिया, यह कह रहा है की हमें छेड़ोगे तो हम छोड़ेंगे नहीं | वह भी इनकी रमजान जैसी मुबारक महीने में,यह धमकी किन्हें दिया गया या दिया जा रहा हैं ? एक तरफ अल्लाह की बात भी झूठी निकली की रमजान के महीने में अल्लाह बड़े बड़े शैतानों को कैद कर देते हैं फिर यह अल्लाह के नज़र में छोटे शैतान हुए ? चाहे वह हिन्दुओं की तरफ से हो शैतानियत और मुसलमानों की तरफ से हो यह शैतानियत |
 
अल्लाह की बातें झूठी साबित हो गई फिर भी रमजान के महीने में आधी रात को माइक बजाकर दूसरों के नींद को भंग करना क्या यह मानवता विरोधी नहीं है, क्या इसे शैतानियत नहीं कहेंगे लोग ? जिस अल्लाह को बड़ा बताया जा रहा है वह अल्लाह कभी भी बड़ा नहीं था और न अल्लाह का बड़ा होना संभव है ? क्यों की जो अल्लाह बैठता है वह तो बैठने वाला तखत से छोटा ही होगा फिर यह बेतुकी बातें क्यों ? इसी लिए तो मैंने कहा की मुस्लमान कौम समझदार नहीं है इस्लाम इसी न समझी के कारण ही प्रथम से लूटमार करते आ रही है | यह अपने जन्म काल से ही मार काट में विश्वास रखती है और दंगा कर के ही लोगों पर इस्लाम को थोंपते आई है |
इसी इस्लाम को स्वीकार न करने पर इनके प्रवर्तक अपने सगे सम्वन्धियों को भी मौत के घाट उतार दिया. यहाँ तक की अपने चाचा को भी मारने में संकोच नहीं किया | जब की इन्हीं मार काट में अपना चार दांत भी तुडवाये जो अल्लाह का खास रसुल कहा जाता हैं इन्हें अल्लाह भी उनके दांत तोड़ने से नहीं बचा सके | यह है इस्लाम और इस्लाम की असलियत | कल रबिवार 17 अप्रैल को रात 8 बजे मेरे लाइव स्ट्रीम में सुनना आप लोग इसी पर ही अपना विचार आप लोगों के सामने रखूँगा | महेंद्र पाल आर्य =16/4/22

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