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मानवों में नफरत फैलाया कुरान ने = प्रमाण देखें

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मानवों में नफरत कुरान ने फैलाया कलसे आगे ||
उसने कहा,भारत में तो मना नही है, इन परिधान में,मैंने कहा मेरे भाई जरा ठन्डे दिमाग से सोच | कि अगर मक्का में मदीना,में कोई धोती पहन कर जाता है तो उसे, वहां रोका जायगा कि नही ? पहली बात तो कोई भी गैर मुसलिम को मक्का या मदीना में जाने ही नही दिया जायगा,वहां कपड़े की बात ही क्या है काफिरों को वहां जाने नहीं दिया जायगा | तू कपड़े की बात क्या कर रहा हैं |
 
अब वहां एक काफिराना लिबास में कोर्ट, पैन्ट, टाई वाला जा सकता है,किन्तु एक धोती वाला इनसान को जाने नही दिया जायगा | उसने कहा यह बात तो है, मैंने कहा, भारत में तू अरबियन लिबास में रहता है अथवा इंगलैंड वाला लिबास में रहता है, आज तक तुझे किसीने कहा या पूछा कि यह लिबास कौन लोगों का है ?
 
मैंने कहा इससे अंदाजा लगा की तुम इस्लाम वालों को भारतीय लिबास{परिधान} ही पसन्द नही तो भारतीय लोगों को पसन्द करना कैसे संभव होगा ? कितनी संकीर्णता है, तुम इस्लाम वालों में, और इन भारत जैसे काफ़िर मुल्कवालों को भी तुम सहन नही करते | भारत के लोग कितने उदार हैं, यहाँ के लोगों में नफरत ही नही है पर तुम इस्लाम वाले इसी देश में रह कर भी इस देश के परिधान को अपनाने को तैयार नही हो |
 
छोड़ उस अरब को यही भारत में ही बता की धोती पहनकर कोई मस्जिद में जाना चाहता है क्या तू उसे मस्जिद में घुसने देगा अथवा बाहर से उसका लाँग उतरवाएगा ? यानी कोई भी धोती वाला लाँग उतारे बिना मस्जिद में घुस नही सकता, चाहे कोई धोती वाला मुसलमान भी होगा उसे भी लांग खोल कर ही मस्जिद में घुसना होगा |
बता यह कौनसी मानसिकता की बात है, की धोती से कितना नफरत है ? फिर तुमलोग भाईचारे की बात करते हो ? तुम लोगों को शर्म होना चाहिए, की इन भारतियों से किस प्रकार की नफरत तुम्हें सिखाया इस्लाम ने ?
 
फिर भी तुम कहते हो इस्लाम का अर्थ शांति है, भाईचारा है ? अरे मानव को मानवों से नफरत करना तो इस्लाम ही सिखाया है मुसलमानों को मुसलमान छोड़ काफिरों से, यहूदी, नसरानियों से दोस्ती तक रखने को मना किया है अल्लाह ने, देखो अपना कुरान |
 
सूरा- इमरान -28= सूरा- निसा =144 = सूरा मायदा =51+57 =और भी है | मेरी लिखी पुस्तक वेद और कुरान की समीक्षा से, इसे सही ढंग से पढ़ें और विचार करें, दुनिया में नफरत कौन फैलाया है ? प्रमाण प्रस्तुत भी कर देता हूँ जिस से कि किसी को सन्देह ना रह जाये |
لَا يَتَّخِذِ الْمُؤْمِنُوْنَ الْكٰفِرِيْنَ اَوْلِيَاۗءَ مِنْ دُوْنِ الْمُؤْمِنِيْنَ ۚ وَمَنْ يَّفْعَلْ ذٰلِكَ فَلَيْسَ مِنَ اللّٰهِ فِيْ شَيْءٍ اِلَّآ اَنْ تَتَّقُوْا مِنْھُمْ تُقٰىةً ۭ وَيُحَذِّرُكُمُ اللّٰهُ نَفْسَهٗ ۭ وَاِلَى اللّٰهِ الْمَصِيْرُ 28 ؀
ईमानवालों को चाहिए कि वे ईमानवालों से हटकर इनकारवालों को अपना मित्र (राज़दार) न बनाएँ, और जो ऐसा करेगा, उसका अल्लाह से कोई सम्बन्ध नहीं, क्योंकि उससे सम्बद्ध यही बात है कि तुम उनसे बचो, जिस प्रकार वे तुमसे बचते है। और अल्लाह तुम्हें अपने आपसे डराता है, और अल्लाह ही की ओर लौटना है | सूरा-न० 3 =इमरान=आयत = 28 =
يٰٓاَيُّھَا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا لَا تَتَّخِذُوا الْكٰفِرِيْنَ اَوْلِيَاۗءَ مِنْ دُوْنِ الْمُؤْمِنِيْنَ ۭ اَتُرِيْدُوْنَ اَنْ تَجْعَلُوْا لِلّٰهِ عَلَيْكُمْ سُلْطٰنًا مُّبِيْنًا ١٤٤؁
ऐ ईमान लानेवालो! ईमानवालों से हटकर इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। क्या तुम चाहते हो कि अल्लाह का स्पष्टा तर्क अपने विरुद्ध जुटाओ ? सूरा=न०=4=निसा= आयत =144 =
يऐ ईमान लानेवालो! तुम यहूदियों और ईसाइयों को अपना मित्र (राज़दार) न बनाओ। वे (तुम्हारे विरुद्ध) परस्पर एक-दूसरे के मित्र है। तुममें से जो कोई उनको अपना मित्र बनाएगा, वह उन्हीं लोगों में से होगा। निस्संदेह अल्लाह अत्याचारियों को मार्ग नहीं दिखाता | सूरा न०=5=मायदा=आयत 51=
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الْيَهُودَ وَالنَّصَارَىٰ أَوْلِيَاءَ ۘ بَعْضُهُمْ أَوْلِيَاءُ بَعْضٍ ۚ وَمَن يَتَوَلَّهُم مِّنكُمْ فَإِنَّهُ مِنْهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الظَّالِمِينَ [٥:٥١]
ऐ ईमान लानेवालो! तुमसे पहले जिनको किताब दी गई थी, जिन्होंने तुम्हारे धर्म को हँसी-खेल बना लिया है, उन्हें और इनकार करनेवालों को अपना मित्र न बनाओ। और अल्लाह का डर रखों यदि तुम ईमानवालेَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّخِذُوا الَّذِينَ اتَّخَذُوا دِينَكُمْ هُزُوًا وَلَعِبًا مِّنَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ مِن قَبْلِكُمْ وَالْكُفَّارَ أَوْلِيَاءَ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ [٥:٥٧]
ऐ ईमानदारों जिन लोगों (यहूद व नसारा) को तुम से पहले किताबे (ख़ुदा तौरेत, इन्जील) दी जा चुकी है उनमें से जिन लोगों ने तुम्हारे दीन को हॅसी खेल बना रखा है उनको और कुफ्फ़ार को अपना सरपरस्त न बनाओ और अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़ुदा ही से डरते रहो |
 
भाई मैंने तुम्हें जो बताया झूठ है या सत्य तुम अपनी कुरान से पुछो अपने अल्लाह से पुछो यह आयत कुरान का है अथवा नही ? मैं तुम्हें एक घटना सुनाता हूँ, पिछले 1985 की बात है हरियाणा का एक व्यक्ति जो सौदिया में नौकरी करता था | वह आर्य समाजी था राम कुमार भरद्वाज नाम है उनका, जो एक दिन बाज़ार में खरीदारी के लिए निकला था उसके हाथ में सत्यार्थप्रकाश नामी किताब थी |
जिस दुकान से वह कुछ सामान लेना चाहा, अपनी पुस्तक दुकान के किसी सामान पर रख कर अपना लेने वाला सामान ले रहा था | दुकानदार ने सत्यार्थप्रकाश के रखने पर उसे पकड़ लिया, और पुलिस को दे दिया | कई दिनबाद इस गलती के कारण सौदी सरकार ने उसे सजाये मौत सुनादिया | उनदिनों सार्वदेशिक सभाप्रधान श्रीलाला रामगोपाल जी शालवाले ने,भारत के प्रधान मन्त्री राजीवगाँधी से, सम्पर्क कर उस राम कुमार भरद्वाज को उसी रात में ही दिल्ली मंगवाया था | यह है तुम्हारा इस्लाम कितने संकीर्ण विचार है और कितना घटिया दिमाग है जरा सोचो तो |
जरुर पढ़ें धन्यवाद के साथ महेन्द्र पाल आर्य =1 /2 /21 =

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