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मेरे जीवन को बदलने वाली किताब है ||

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मेरे जीवन को बदलने वाली किताब है ||

सत्यार्थप्रकाश ही मेरे जीवन को अन्धकार से प्रकाश में लाया,धर्म और मज़हब का बोध कराया आदि। यही पुस्तक है जिसपर मैं आज 38 वर्ष से दुनिया वालों को दिखाता बताता आ रहा हूँ ,इसी पुस्तक के आधार पर कई हज़ार लोगों को वैदिक धर्मी बनाचुका हूँ ।

 

डॉ0 जाकिर नाईक का सिर्फ सुदर्शन चैनल में पर्दाफाश ही नहीं किया, अपितु आज भारत सरकार ने भी उसपर प्रतिबन्ध लगाया ।

इसी सत्यार्थप्रकाश केस को दिल्ली हाईकोर्ट से जीत दिलवाई । इस केस के जीतने पर कई आर्य प्रतिनिधि सभा, और कई आर्य संस्था ने मुझे सम्मानित भी किया आदि।

मेरा सिर्फ कहना यह है, जो लोग आज इस पुस्तक की रक्षा करना चाह रहे, पहले वह यह बताएं की उस पुस्तक पर आफत कौन सी आ पड़ी जिसके लिये रक्षा की जरूरत पड़ी?

 

केस डाल कर जब परेशानी में डाली गई उस समय यह रक्षार्थि नाक में तेल डाल कर सो रहे थे। जब इसकी रक्षा की ज़रूरत थी उस समय यह रक्षार्थी कोमा में थे आज होश आने पर रक्षार्थ व्याकुल हो उठे ।

वाह रे रक्षक  इस रक्षा की क्या तारीफ करें जब आर्य कहलाने वालों ने ही उसी सत्यार्थप्रकाश में मिलावट की, उस वक्त भी यह रक्षार्थी बेहोश ही थे। जब पंडित रतिराम आर्य ने सत्यार्थप्रकाश का भंडा फोड़ लिखा उस समय भी यह नाक में तेल डाल कर सो रहे थे । सत्यार्थ प्रकाश के दूसरे संस्करण को लेने में 3  दिन अनशन करने पर ही उस सत्यार्थ प्रकाश को परोपकारिणी से निकाले थे जब उसकी रक्षा की बात थी तब इन रक्षार्थी का जन्म भी नहीं हुवा था ।

 

मुझे किसी से क्या लेना है भला मैं पेट पाल रहा हूँ दक्षिणा के लिए काम कर रहा हूँ । पर मैं इन रक्षार्थी से पूछता हूँ महेन्द्रपाल को कितना क्या दिया ? दिया कुछ नहीं जमा खर्च लेने लगे । वाह रे रक्षक जिस सत्यार्थप्रकाश के प्रचार में 6 बार मुसलमानों का हमला सहा हूँ, निरंतर धमकियां ,गाली माँ बहन का सुनकर सत्यार्थ प्रकाश के प्रचार में पूरा परिवार को लगा रखा हूँ, बेटे गुरकुल का आचार्य दामाद गुरकुल का आचार्य, एक बेटी व्याकरणाचार्य दो वेद जिसे कंठस्थ । पूरा समय जान आफत में डाल कर प्रचार करने वाला सत्यार्थ प्रकाश की रक्षा नहीं कर रहा है ।

 

सत्यार्थ प्रकाश की रक्षा जो लोग करना चाह रहे जो समाजों में ताला डलवा रहे, कोठी में आराम फर्मा रहे, 6 अंगरक्षक लिए फिरे, समाजों से धन उगाये ।

जिनलोगों ने अपनी नौकरी छोड़ अपना धन इन्हें दिया हो उसे अपनी मेम्बर शिप से निकाल दें,  यह है सत्यार्थप्रकाश के रक्षक मित्रों, जो लोग भले ही अपने नाम से आर्य लिखें, अगर ऋषि दयानंद के आर्य समाज से सहमत होते, फिर अलग संस्था किसलिए बनाते भला ?

आज आर्य जंनोंको इन रक्षकों से आर्यसमाज को बचाने की ज़रूरत है, कारण यह भक्षक ही अपने को रक्षक बता रहे हैं भाइयों हमें सावधानी वर्तनी होगी इन रक्षकों से, तभी आर्यसमाज को बचा पाएंगे। आज ऋषि दयानंद जी के नाम से ही लोग दूकान चलाने में अपने को सफल कारबारी मान रहे हैं | सिर्फ मान ही नहीं रहे अपितु सब को दिख भी रहा है |

और यह बात भी सत्य है की ऋषि दयानंद जी के नाम से अथवा उनकी बनाई हुई संस्था के आमदनी खाकर ही तो लोग अपनी मकान दूकान व्यापर चला रहे हैं | जहां जो बैठे हैं मानलिया जाय की फेबिकोल लगाने के बाद ही बैठा गया हो |

 

इसमें कोई संदेह नहीं की सपूर्ण भारत भर यही दशा है जहां जहां संपत्ति है इस संस्था के नाम से हर जगह देखें यही कब्ज़ा बाजी को लेकर चलरहे केस निम्न न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक केस चल रहा है,सारे लोग मूक दर्शक बने हुए हैं |

 

आर्य समाज के नाम जो स्कुल और विद्यालय सम्पूर्ण भारत में संचालित है प्रायः स्कुल में अध्यापक और सञ्चालन कमिटी के साथ केस चल रहा है | कुर्सी में बैठे लोग इसकी मोटी आमदनी में अपना हाथ साफ कर रहे हैं आदि, यहाँ तक की इसी संस्था के पास गुरुकुल कांगड़ी भी है, जिसे विश्वविद्यालय कहते हैं वहाँ भी विबाद जो गुरुकुल कांगड़ी फार्मेसी है वह भी किसी के कब्जे में है |

 

उसी हरिद्वार के आर्य समाज में कई वर्ष पहले देखा यज्ञशाला में कब्जा किसी का दूसरी मंजिल पर कब्ज़ा किसी का और निचे बाहर वाली हिस्से में पुलिस का कब्ज़ा | और यही अधिकारी पैसा देकर पुलिस रखा है तीसरा कोई कब्ज़ा न कर सके,`यह सब आँखों देखा हाल लिख रहा हूँ |

 

दिल्ली वासियों ने भी देखा महर्षि दयानंद जी के नाम से असफ अलि रोड में जो भवन है जिसमें कई वर्षों तक खर्चा देकर पुलिस को पाला गया | गेट के पास एक बंगाली सुइट की दूकान वाले को किराया पर भी दिया गया है | जब की लिपटन चाय कम्पनी से एक फ्लोर खाली कराया गया आदि |

जिन्दगी ख़तम हो जायेगी मेरी फिर भी इन बातों को लिखकर बताकर समाप्त किया जाना सम्भव नहीं होगा इतना जरुर जान लेना चाहिए |

महेन्द्र पाल आर्य 26,12, 20,,

 

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