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यह है मज़हबी दुकानदारों की असलियत ||

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यह हैं मज़हबी दुकानदारों की असलियत ||
यह प्रमाण इबने कसीर हिन्दी भाष्य जिल्द 6 पेज 523,524 पारा 29 सूरा 74 मुदस्सिर आयात 31,32,33,34,25,36,37, का सन्दर्भ = इन आयातों में अल्लाह ताला फरमाते हैं जहन्नुम के अजाब के बारे में, कि जिनके लिए फ़रिश्ते मुक़र्रर है मुशरिकों को सब सम्भाल ने वाले जहन्नुम के दरोगा होंगे और उनकी तादाद बताई जाएगी यह बातें सुनकर अबुजहल जो हुजुर के चाचा थे उन्हों ने कहा ऐ कुरैशियों अगर वेह उन्नीस होंगे | तो ज्यादा से ज्यादा हम एक सौ नब्बे हैं सब मिलकर उन्हें हरा देंगे | इसपर कहा जाता है की वह फ़रिश्ते हैं इंसान नहीं, उन्हें तुम न हरा पाओगे न थका पाओ गे |
जिस जहन्नुम का डर दिखाया गया, और जिस जन्नत का लोभ दिखाया गया यह बातें सिर्फ कुरान और बाइबिल में नहीं अपितु दूसरी मजहबी पुस्तकों में भी बताये गये हैं | यह जितने भी स्वर्ग और नरक वाली बातें है वेह सब मत मजहब वालों नें यही बातें बताये हैं | इसे अपने नज़रों से किसी इंसान ने देखा तक नहीं |
यह सब किताबी जमा खर्च है और चर्चा उसकी की है जिसे कभी किसी ने देखा तक नहीं है | और न तो आज तक उसे कोई देख कर आया सिर्फ किताब में ही लिख दी गई है उसे पढ़ कर या फिर सुनकर उसी बात पर आज दुनिया में मानवों को मानव समझने को तैयार ही नहीं | और धरती पर खून खराबा करते हैं केवल इन्ही बिना देखि बातों पर अपनी जानें भी मिटाने को तैयार हो जाते हैं | यही है मजहबी जुनून या मजहबी कीड़े की काटी हुई बातें |
जिसे आज मानव कहला कर भी सत्यता से कोसों दूर हैं सत्य को जानने के लिए उनके दिमग से यह विचार नहीं कर पाते, की हम मानव होकर भी इन किताबी जमा खर्च में ही उलझे हुए हैं | आज हर एक दिन कोई न कोई मजहबी दुकानदार आप के दरवाज़े पर खड़ा है,सुबह उठते ही निमंत्रण लेकर पहुंचते हैं | साहब हम ही हैं उस जन्नत के ठेकेदार आप मेरी बातों को मान लीजिये हर प्रकार की सुख सुविधा के देने वाले हम ही है | इससे बाहर किसी के पास कुछ नहीं है जन्नत में भिजवाने की जिम्मेदारी हमें अल्लाह ने दी है | इसमें जो जो शर्तें हैं आप को उसे अक्षरस: मानना पड़ेगा स्वीकारना पड़ेगा तो आप के लिए जन्नत पक्की, आप के एक बार चले जाने से वहाँ हर प्रकार का सुख साधन मिल जायेंगे |
अगर कोई उनसे यह पूछे कि मेरे भाई आखिर यह सभी चीज मिलेंगे कहाँ ? तो यह दूकान दार जितने भी हैं आप के नज़र के सामने सबके सब एक स्वर में ही आपसे कहेंगे जी, यह सभी मिलेंगे तो जरुर इसमें कोई संदेह नहीं किन्तु यह सभी मिलेंगे मरने के बाद ही | अगर आप यह पूछें क्या आप ने यह सभी सुख सुविधा अपने नज़रों से देखा है ? सबका ज़वाब यही होगा की देखा तो नहीं पर पढ़ा जरुर हैं | यह है सभी मज़हबी दूकानदारों की असलियत | महेन्द्र पाल आर्य 20/5/22

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