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वासिम रिजवी को मरने से पहले चीनको मारकर दिखाना चाहिए मुसलमानों को |

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अगर इस्लाम वालों में दम है तो वसीम रिज़वी नहीं, चीन का गलाकाट कर दिखाए ||

सभीआर्यजनों को सादर नमस्ते ||

आज कई दिनों के बाद नेपाल देश से भारत पहुंचते ही सुचना मिली की शिया मजहब से संपर्क रखने वाले वासिम रिज़वी साहब ने भारत के सर्वोच्य न्यायलय में PIL दाखिल किया कुरान में वर्णित कुछ आयातों को कुरान से हटाया जाय जो आयतें आपत्ति जनक है |

 

एक न्यूज़ चेनल में उन्हें बोलते हुए सुना की पिछले जनवरी महीने में उन्हों ने इन्ही आयातों को लगभग 18 मोयतेबर मान्यता प्राप्त मदरसों के सञ्चालन कर्ताओं को भेजा | और लिखा की यह आयतें आपत्ति जनक है हमारे बच्चों पर इसका गलत प्रभाव हो रहा है जहाँ मुशरिकों को और गैर मुस्लिमों को हत्या करदेने की बात बताई गई है |

उन्हों ने जो तर्क दिया है वह बहुत ही सठिक और सत्य से रूबरू कराने वाली है | उन्हों ने कहा कुरान क्लामुल्लाह है लेकिन अल्लाह ने सीधा नहीं भेजा भाया हज़रत मुहम्मद {स} के द्वारा अल्लाह ने भेजी |

और यह लिखी गई खलीफाओं के द्वारा वह भी एक बार में नहीं कई बार बदल बदल कर इसे पूरी की हजरत युस्मान गनी {रजी:} ने | अब इसमें जो आयतें हैं वह अल्लाह की भेजी गई आयतें है अथवा संकलन कर्ता ने अपने तरफ से मिलाया अथवा नहीं इसका प्रमाण कहाँ और किसके पास है ?

अब इस कुरान में सूरा 9 -आयात 5 = आयात 14 आयात 29 = आयात 32 आयात 36 = आयात 73 = आयात 84 =85 =आयात 123 = और भी अनेक है |

 

सूरा अन्फाल =आयात 39 = आयात 65 =और भी अनेक है = इन्हों ने 26 आयातों का उलेख किया है | और यह बताया है जहाँ इसी कुरान में सूरा 5 के आयत 32 में यह बताया गया हो की किसी ने एक आदमी की हत्या को मानों वह सम्पूर्ण मानवों की हत्या की | यह दोनों विरोधी बातें अल्लाह की क्यों और कैसी हो सकती है |

 

जब किसी भी मदरसे वालों का कोई ज़वाब उन्हें नहीं मिली तो उन्हों ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल किया  सब मिलाकर बात इतनी है |  जब की भारतवासियों के लिए यह कोई नई बात नहीं है की कुरान पर किसी ने सवाल उठाया ?

 

भारत में यह सवाल सबसे पहले उठाने वालों में राजा राम मोहन राय – सर यदुनाथ सरकार – मुन्शी इन्द्रमण – ऋषि दयानन्द जी ने आर्य समाज के जन्मकाल से ही आर्य जनों को मात्र बताया ही नहीं  अपितु अपनी कालजयी ग्रन्थ में भी पूरा एक समुल्लास ही लिखकर जनमानस के पटल पर रख दिया | इस पुस्तक पर मुसलमानों ने प्रतिवंध लगाने का भी खूब प्रयास किया | लेकिन विफल ही हाथ लगी अभी 2008 में दिल्ली हाई कोर्ट ने इसी सत्यार्थ प्रकाश के पक्ष में फैसला सुनाया जिसका मैं चाश्मेदिद गवाह हूँ |

इसी कुरान की 24 आयातों पर प्रतिवंध लगाने के लिए 1984 में अखिलभारत हिन्दू महा सभा के उपाध्यक्ष इन्द्रसेन शर्मा जी ने दिल्ली के मेट्रो पोलिटोन मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत किया था | पुनः 1985 में चांदमल चोपरा और शीतल सिंह जी ने कोलकाता हाईकोर्ट में पद्मा खास्त्गीर जी के इजलास में केस दायर किया, जो आँखों देखा हाल मैं बता रहा हूँ |

तो वासिम रिजवी पहले व्यक्ति ही नहीं है जो इन कुरानी आयातों पर प्रतिबन्ध की बातें की, बहुत पहले से यह बातें चलती आ रही है आर्य समाज ने सबसे पहले यह बातें दुनिया वालों के सामने उजागर किया है |

रही बात वसीम रिज़वी की, आज कई दिनों से मुसलमान धमकियाँ दे रहे हैं गर्दन से सिर अलग करने की बात भी कर रहे हैं और कुछ लोगों ने गला काटने वालों को इन्याम देने की भी बातें की है |

भाइयों वसीम रिजवी तो मात्र कुरान की 26 आयातों को बातें की है की यह आयतें निकाल दि जाएँ कुरान से, अगर इतने कहने पर ही मुसलमान अपनी नाराज़गी दर्शा रहे हैं ? तो चीन के जिमपिंग ने तो पूरी कुरान को अग्नि की हवाले किया है और कहीं कहीं कुरान को गन्दी नाली में डाल दिया है |

इसपर मुसलमान मौन किस लिए हैं ? किसी भी मुसलमान ने आज तक चीन के विरोध में कुछ बोला है ? क्यों नहीं बोला आज चीन में इस्लाम पर अत्याचार हो रहा है कोईभी मुसलमान जुबान खोलकर नहीं दिखाया और न अरब देश ही उसपर कुछ बोला, और अपने को कट्टर मुसलमान होने का दावा करने वाला देश पाकिस्तान कुछ बोल पाया ? क्यों नहीं बोलते यह भारत देश में ही किस लिए बोलते हैं ?

यह मुसलमान कहलाने वाले भारत में हो अपनी मर्दानगी दिखाना चाहते हैं, चीन के खिलाफ नहीं बोल सकते चीन धो रहा है इस्लाम नामी कुरान और कुरान के मानने वालों को | भारत को भी इसी प्रकार कठोरता को अपना कर दुष्टों को दमन करना चाहिए |

महेन्द्र पाल आर्य = 15 /3 /21

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