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वेद ईश्वरीय ज्ञान है, कुरान नहीं प्रमाण ||

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वेद ईश्वरीय ज्ञान है, कुरान नहीं प्रमाण ||
इस वेद ज्ञान से कुरान का तथा किसी और मजहबी किताबों का कोई मेल नहीं है | इसका मतलब भी आप लोग समझ गए होंगे की वेद का उपदेश मानव मात्र के लिए हैं ईश्वर में मानवों में भेद नहीं डाला और न भेद डालने का काम ईश्वर का है | इसी प्रकार वेद और कुरान को देखते जायेंगे तो साफ साफ दिखाई देगा की ईशर क्या है और अल्लाह क्या है ? जो अल्लाह सिर्फ और सिर्फ इस्लाम की बात करें इस्लाम के मानने वालों की बात करें | धरती पर केवल मुसलमान ही मानव नहीं है किन्तु इसी दुनिया में और लोग भी रहते हैं अल्लाह ने उन सबकी गिनती काफिरों में की है बेदीन और बे ईमानों में किया है |
जब की दुनिया का बनाने वाला अल्लाह को ही कह ते हैं लोग,जब वेह दुनिया का बनाने वाला है तो दुनिए के मानवों में भेद पैदा करना क्या उस बनाने वाला का काम हो सकता हैं ? 27/82
وَإِذَا وَقَعَ الْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَابَّةً مِّنَ الْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ النَّاسَ كَانُوا بِآيَاتِنَا لَا يُوقِنُونَ [
अर्थ :- फिर वही लोग मानने वाले भी तो हैं जब जब उन लोगों पर कियामत का वादा पूरा होगा तो हम उनके वास्ते जमीन से एक चलने वाला निकाल खड़ा करेंगे जो उनसे बाते करेगा की यह लोग हमारी आयातों का यकीन नहीं रखते थे |
अब जमींन के अन्दर से किसी जानवर का निकलकर आदमी से बातें करना यह कौन सी मानवता के दायरे की बात है ? और वेह जानवर अल्लाह की किताब को जो लोग नहीं मानते उनके लिए गवाह देंगे | यह कौन सी अक्लमंदी की और मानवता की बात हुई जमींन से जानवर निकल कर मानवों से बात करें यह सच कैसा माना जाय ? जिस प्रकार की सृष्टि नियम विरुद्ध बातें कुरान में बार बार देखने को और पढने को मिलेगा | कुरान में ऐसी बातें अनेकों है कहाँ कहाँ बताया जाय और लिखा जाए, विज्ञान विरुद्ध मानवता विरुद्ध बातें कुरान में हैं | वेद में इस प्रकार की बातें नहीं देख पाएंगे | अर्थात वेद विज्ञानं सम्मत हैं सृष्टि सम्मत हैं मानवता के पक्ष में हैं मानवता विरुद्ध कोई बातें होना संभव नहीं है, कारण परमात्मा पर दोष लगेगा | मात्र इतना ही नहीं अल्लाह की कलाम कुरान में अल्लाह ने अपने नबी को कैसे कैसे लोगों को मार ने का उपदेश दिया है देखें | कुरानी किस्सा,जो वेद में नहीं हैं | अल्लाह ने 54/9 में यह किस्सा, बताया है यही किस्सा और जगह भी है इसी कुरान में |
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ فَكَذَّبُوا عَبْدَنَا وَقَالُوا مَجْنُونٌ وَازْدُجِرَ [٥٤:٩]
अर्थ : इनसे पहले नुह की कौम ने भी झुठलाया था, तो उन्हों ने हमारे बन्दे नुह को झुठलाया, और कहने लगे यह तो दीवाना है |
فَدَعَا رَبَّهُ أَنِّي مَغْلُوبٌ فَانتَصِرْ [٥٤:١٠]
अर्थ :-और उनको झिडकियां भी दी गई, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की के अल्लाह मैं इनके मुकाबले में कमजोर हूँ | 54/10
فَفَتَحْنَا أَبْوَابَ السَّمَاءِ بِمَاءٍ مُّنْهَمِرٍ [٥٤:١١]
अर्थ :-तो अब तू ही इनसे बदला ले तो हमने मुसलाधार पानी आसमान के दरवाजे खोल दिए | 54/11
وَفَجَّرْنَا الْأَرْضَ عُيُونًا فَالْتَقَى الْمَاءُ عَلَىٰ أَمْرٍ قَدْ قُدِرَ [٥٤:١٢]
अर्थ :- और जमीन से चश्मे जरी कर दिए तो एक कम के लिए जो मुक़र्रर हो चूका था दोनों पानी मिल कर एक हो गया | 54/12
وَحَمَلْنَاهُ عَلَىٰ ذَاتِ أَلْوَاحٍ وَدُسُرٍ [٥٤:١٣]
अर्थ :- और हमने एक कश्ती पर जो तख्तों और कीलों से तैयार की गयी थी स्वर किया | 54/13
تَجْرِي بِأَعْيُنِنَا جَزَاءً لِّمَن كَانَ كُفِرَ [٥٤:١٤]
अर्थ :- और वह हमारी निगरानी में चल रही थी यह शख्स नुह का बदला लेने के लिए जिस को लोग न मानते थे | 54/14 आयत 9 से 14 तक है |
हजरत नुह पैगम्बर की चर्चा की गई जबकि इससे पहले भी कई बार की गई है | इन आयातों के सन्दर्भ में बताया गया है की अल्लाह अपने नबी हज़रत मुहम्मद {स] को बता रहे हैं की आपसे पहले हजरत नुह की उम्मतों ने भी हजरत नुह को झुठलाया था, यहाँ तक की उन्हें मजनूं कहा, डाटा दपटा और धमकाया भी |
और कहा ऐ नुह अगर तुम अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आयें तो तुम्हें पत्थरों से मार मार कर मार दिया जायेगा | हमारे पैगम्बर हजरत नुह ने हमें पुकारा ऐ मेरे परवर दिगार मैं इन लोगों के सामने कुछ भी नहीं हूँ बेहद कमजोर और मजबूर हूँ किस तरह अपनी हस्ती को और अपने दीन बचा सकता हूँ ? तुही मुझे मदद फरमा तुही मुझमें ताकत दे |
हज़रात नुह के यह दुआ मने पर अल्लाह ने उन्हें एक नाव बनाने का हुकुम दिया और कहा जिवजन्तु जो कुछ भी है हर एक का दो दो उस कश्ती पर लेजा हम दुनिया को फना कर देते हैं सब को डुबो कर मरेंगे | 11/40 में देखें
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَمْرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ قُلْنَا ٱحْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّۢ زَوْجَيْنِ ٱثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ ٱلْقَوْلُ وَمَنْ ءَامَنَ ۚ وَمَآ ءَامَنَ مَعَهُۥٓ إِلَّا قَلِيلٌۭ ٤٠
अर्थ :- यहाँ तक कि जब हमारा आदेश आ गया और तन्नूर उबलने लगा, तो हमने (नूह़ से) कहाः उसमें प्रत्येक प्रकार के जीवों के दो जोड़े रख लो और अपने परिजनों को, उनके सिवा, जिनके बारे में पहले बता दिया है और जो ईमान लाये हैं और उसके साथ थोड़े ही ईमान लाये थे।
उनकी यह दुआ कुबूल हुई और काफिरों पर मशहूर तूफ़ान आया, मुसलाधार बारिश आसमान से और उबलते हुए पानी के चश्में जमीन से खोल दिए गये | यहाँ तक की आसमान से और जमीन से पानी निकलना बंद न हुआ, लिखा की अल्लाह ने हुकुम दिया की पानी बंद न हो उबलता पानी और यह फैसला होकर रहा | यही घटना कुरान में कई बार बोला गया है जो बातें समझने वाली है वे यह है की एक पैगम्बर अल्लाह का उसे अल्लाह ने किसी अपनी बात को देकर भेजा, की जाओ इसे फैलाओ मानवों में | तो मानवों को उनकी बातें पसंद नहीं आई और लोगों ने उनकी बातों से नाराज़ होकर उन्हें मारने तक की धमकियाँ दे डाली | अब यह पैगम्बर अल्लाह से दुआ मांग रहे हैं मेरी बात को यह लोग नहीं मानते इन्हें ख़तम करदें |
इस प्रकार कोई नेक इन्सान भी किसी की हलाक करने की दुआ नहीं मांगते यहाँ अल्लाह का पैगम्बर होकर फ़ना करने की दुआ मांग रहे हैं | और अल्लाह उस दुआ को कुबूल कर रहे हैं | जैसा अल्लाह वैसा उसका पैगम्बर |
महेंद्र पाल आर्य

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