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  || वेद विचार ही मुसलमान बनने से बचा सकता है हिन्दुओं को ||

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|| वेद विचार ही मुसलमान बनने से बचा सकता है हिन्दुओं को ||

आप लोगोने देखा होगा अभी Venkatesha hariharan जो मुसलमान बनने जा रहे थे मैंने आप लोगों को यह जानकारी दी थी, यह लेख पिछले 3 /2/16 =को मैंने लिखा था उसे आप लोग भी एक बार जरुर पढ़लें | हिन्दुओं का वैदिक धर्मी बने रहने का उपाय क्या है ?

कल मुझे अनेक लोगों ने अपनी चिन्ताएं व्यक्त कि है फेसबुक और व्हाट्सअप पर, हिन्दुओं को  मुसलमान बनने से कैसे बचाया जा सकता है ? जिसपर मैंने एक छोटा सा विचार दिया था, आज मैं स्पष्ट तरीका लिखकर बताता हूँ हिन्दू कहलाने वालों को, मुसलमान बनने से बचने का एक मात्र रास्ता है वैदिकज्ञान, अथवा वेद विचार ही मात्र हिन्दुओं को नही किन्तु मानव मात्र को सभी मत पन्थों से बचा सकता है | कारण एक मात्र वेद ही ईश्वरीय ज्ञान है जो मानव बनने का उपदेश देता है, मनुर्भव: मानव बनो | यह उपदेश धरती पर किसी भी मजहबी किताबों में, या मजहबी पुस्तकों में नही मिलता |

आज धरती पर जितने भी मजहब है, अथवा उनकी जो पुस्तकें हैं वह मानव बनने बनाने के बजाय अपनी मजहब में मिलने मिलाने की बात करता है | जैसा इस्लाम दुनिया के लोगों को मुसलमान बनाता है, और वह कहते हैं अल्लाह पर ईमान ले आव, फरिश्तों पर, एकलाख या दो लाख,24 हज़ार पैगम्बर पर,रसूलों पर, कुरान पर, उससे पहले की 3 किताबों पर, तौरात, जबूर, तथा इंजील पर, कयामत के दिन पर, मौत के बाद जन्नत और जहन्नुम {स्वर्ग, नरक} पर ईमान {विश्वास }करो, इसे ईमान कहा जाता है | साथ ही साथ कलमा पढना जो 6 हैं, नमाज पढना जो 5 बार का फ़र्ज़ {जरूरी }है,रोजा रखना,जो पूरा एक महिना का होता है, जकात देना जो एक सौ में 2,50, यानि ढाई रुपया का दान देना, और हज {मक्का मदीना} का परिक्रमा करना, आदि यही ईमान है |

ईमान लाने या इन सभी बातों पर विश्वास करने और दिलसे मानने वाला ईमानदार कहलाओगे, और जो एक बार कलमा पढ़ लिया वह जन्नत के भागीदारी हो गया, और अल्लाह सभी प्रकार के गुनाह {पाप} क्षमा करदेंगे जन्नत नसीब करेंगे | और उस जन्नत में सभी प्रकार की सुख सुविधा, खाने पीने से ले कर बड़े ही ऐश आराम मिनले वाला स्थान है जहाँ तुम हमेशा हमेशा के लिए रहोगे | जहाँ बाग़ बगीचा, फल मूल कन्द, सुन्दरी {हुर } लौंडा {गिलमान} आदि अर्थात जितने भी सुख चाहिए वह सभी वहीँ मिलेंगे | जिसका वादा अल्लाह ने कुरान की आयातों के माध्यम से किया है,और  अल्लाह का वादा पक्का होता है आदि | यह इस्लाम का वादा या अल्लाह का वादा है इस दुनियावी चीजों से मोह छोड़ उस जन्नती चीजों से लगाव रखो एक बार मुसलमान बन जाव तुम्हारा जीवन ईमान वाला बन जाये, बस यही एक रास्ता है जो अल्लाह का रास्ता है |

इसके बाहर जितने भी है वह सब काफिराना या कुफ्र का रास्ता है और मुसलमान बनने पर जो सुख सुविधा है, ठीक उसके विपरीत उतना दुःख ही दुःख तुम्हें मिलेंगे मुसलमान ना बनने पर | यहाँ तक की तुम्हें आग से गुजरना पड़ेगा लोहे के जन्जीर गर्म करके तुम्हें बांधा जायगा गर्म- गर्म पीप तुम्हें पिलाये जायेंगे तुम्हारी आतें निकलने को होगी पर तुम्हारी मौत नहीं आएगी आदि, तुम मुसलमान बन जाव | और अगर तुम मुसलमान हो तो जन्नत जाने के लिए अल्लाह के रास्ते में निकलो | कुरान,हदीस भरे पड़े हैं इन सभी उपदेशों से, यह मत समझना की यह उपदेश सिर्फ अल्लाह का ही है ? यही उपदेश पैगम्बरे इस्लाम अल्लाह का प्यारा हबीब हजरत मुहम्मद {स} का भी है, सब से प्रमाणिक हदीस बुख़ारी शरीफ जिस का नाम है, उसमें एक अध्याय है जिस को किताबुल जिहाद के नाम से जाने जाते है |

आज इसी पर अमल करने वाली वही संस्था है जिन्हें सम्पूर्ण धरती पर आतंकवादी संगठन के नाम से लोग पुकार रहे हैं | दरअसल दुनिया के लोग उन्हें कोई कुछ भी कहें,वह लोग सिर्फ और सिर्फ इस्लाम के लिए ही काम कर रहे हैं जिन लोगों का सिर्फ मकसद है इस्लाम के लिए जीना है और इस्लाम के लिए ही मरना है | इनही पर अमल कर रहे हैं आज सभी वह संगठन जो मात्र इस्लाम ही इस्लाम की दुनिया चाहती है, और यही इस्लामिक शिक्षा है | अब इसे कोई कहे की इस्लाम में यह शिक्षा नही है, तो उन्हें मेरी यह खुली चुनौती है वह इस  विषय पर कुरान और हदीसों को सामने प्रमाण के साथ बात कर  सकते हैं | हमारे गृहमन्त्री श्री राज नाथ सिंह जी कई इस्लामिक धर्मगुरु से सलाह करते दूरदर्शन में दिखाया गया, और यह भी देखा मैंने की,एक मौलाना साहब दोनों हाथ उठा कर अल्लाह से दुवा मांगते |

अब वह दुवा में क्या मांग रहे थे, वह तो वही जानें किन्तु इतना अवश्य हिन्दुओं को ध्यान रखना चाहिए की जरुर वह इस्लाम के खिलाफ दुवा नही मांग रहे थे ? बल्की इस्लाम को फ़ैलाने और इस्लाम के विस्तार के लिए ही दुवा मांग रहे थे, कारण वह कुछ भी कहे और करे भारत में इस्लाम का बोल बाला ना हो वह हरगिज नही चाहेंगे वह कुछ भी मांगे अल्लाह से इस्लाम के लिए ही मांगेगे,यही हुक्म अल्लाह का है इसे हर मुसलमान पढ़ा हो और अनपढ़ सब इस बात को भली प्रकार से जानता है |

अब देखें इन्ही विचारों से बचने के लिए अर्थात किसी मत और पन्थ के लिए नही किन्तु सम्पूर्ण मानव मात्र के कल्याण के लिए वेद का उपदेश है, हिन्दू के लिए नही, सिर्फ और सिर्फ मानव मात्र का चहुमुखी विकास के लिए प्रार्थना है वेद में | किसी वर्ग विशेष के लिए नही, किसी सम्प्रदाय के लिए नही, किसी देश वालों के लिए नही | कारण वेद में हिन्दू, मुसलिम, सिख, ईसाई, जैनी, और बौधिष्टों की बातें नहीं है वेद में परमात्मा का उपदेश केवल मानव मात्र के लिए है,मानवता की रक्षा के लिए है राष्ट्र के सभी रहने वालों की भलाई के लिए हैं धरती के प्राणी मात्र के भलाई के लिए है | कारण वेद में परमात्मा ने मानवों को हिन्दू मुसलिम में नही, किन्तु अच्छे और बुरे का बोध मानवों को कराया |

की यह है मानव का कार्य जिससे प्राणी मात्र का भला हो सिर्फ अपना भला नही | यही सारा शिक्षा वेद का है, यज्ञ में जितने भी आहुति दी जाती है बार-बार, यही कहा जाता है,{ इदन्नमम् } यह मेरा नही है

कुरान,और हदीस की, तथा वेद में भी जो बात कही गई अथवा लिखी गई सारा प्रमाण मेरे पास सुरक्षित है कुरान और हदीसों के रूपमें | आवश्यकता हुई तो उसे प्रस्तुत करने की ज़िम्मेदारी मेरी होगी,या फिर जिस किसी को प्रमाण चाहिए वह मेरे बनाये वीडियो में देखा जा सकता है, या देख सकते हैं |

चलते-चलते सभी हिन्दु कहलाने वालों को यह भी बताना चाहूँगा की,मुसलमान होने से हिन्दुओं को बचाने के लिए, मात्र ऋषि दयानन्द के इन्ही वेद विचारों से बचाया जा सकता है | स्वामी विवेकानन्द के विचारों से हिन्दुओं को मुसलमान बनने से बचाया जाना संभव नही |

यह प्रमाण अभी दिल्ली के पुस्तक मेले में जो लोग गये थे उन्होंने भी खूब देखा, की रामकृष्ण मिशन वालों की जो स्टाल लगी थी उसी में इस्लामिक पुस्तकों का भी प्रचार हो रहा था | जिसमें कुरान हदीसों से लेकर हज़रत मुहम्मद {स} के जीवनी तक बेचीं जा रही थी | और अपने सत्य सनातन धर्म जो की मानव मात्र का एक ही धर्म है जिसे वैदिक धर्म कहते हैं, इस सिद्धांत की पुस्तकें उनके पास नही थी | इसका मूल कारण है इन्ही रामकृष्ण परमहंस देव जी जिनके नाम से यह संस्था बनी है उन्हें भी सत्यसनातन वैदिक धर्म के बारे में जानकारी नही थी | उन्होंने सभी मत और पंथ को धर्म माना है,यही मान्यता स्वामी विवेकानन्द जी की भी थी |

स्वामी विवेकानन्द जी गुरु और चेला दोनों ने ही धर्म किसे कहते हैं, और मतपंथ के भेद को नही जाना जिस कारण आज भी हिन्दू कहलाने वाले जिन्हों ने स्वामी विवेकानन्द के अनुयाई अपने को मानते हैं वे लोग आज तक नही जान सके धर्म और मजहब के भेद को | और आज भी रामकृष्ण परमहंस जी की बातों का प्रचार करते हैं जतो मत, ततो पथ | यानी जितना मत और पन्थ हैं सब ठीक ही | यह नही  जान सके की सही और सच्चा या सठिक रास्ता एक ही होता है | जो वेद की मान्यता है नान्यपन्था विद्यतेऽयनाय का, सही और सच्ची रास्ता एक ही है अनेक नही | आयें हम सत्य को जानें ||||

महेन्द्रपाल आर्य =वैदिक प्रवक्ता = 18/11/ 22 ==

 

 

 

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