वैदिक मान्यता में क्या पाया देखें |
वैदिक सिद्धान में यह पाया की परमात्मा सृष्टि के रचने वाले हैं, ईश्वर, प्रकृति,और जीव, यह तीनों अजन्मा अनादी हैं परमात्मा ने मानवों में किसी को काफ़िर कह कर बे दीन और बे ईमान वाले कह कर नहीं पुकारा मानव अपने किये कर्मानुसार जो जन्म जन्मान्तरों से चलती आ रही है मानवों के |
अर्थात सभी अपने कर्मानुसार ही जीवन प्राप्त किया है, पहले किये कर्म के अनुसार मानव बने हैं अब इसके किये कर्मों से कोई देवता बनता है और कोई राक्षस बनता है | देवता कोई आसमान से गिरते नहीं है, और न राक्षस कोई उपर से टपकता हैं | अर्थात यही मानव अपने किये कर्मानुसार जैसा कर्म किया और करता चला आ रहा है उसी कर्मानुसार उसको जन्म मिलता है |
अलग से ईश्वर को किसी को ईमानदार और बेईमान वाला नहीं बनाता उसके किये कर्म से ही वह अपनी पहचान ईमानदारी की बनती है, और किसी के कर्मानुसार ही वह बेइमानी और धोखा धडी करता है | मानवों के कर्मानुसार कोई नेक बनता है और कोई दुष्ट बनता है, यह सिलसिला आदि सृष्टि से चलती चली आ रही है |
लेकिन इस्लामिक मान्यता तो पहले लिख आया हूँ की अच्छे और बुरे का किस्मत अल्लाह ने बनाया है | जब अल्लाह ने दुनिया बनाई तो कलम पहले बनाया इन्सान की किस्मत लिखने के लिए | परन्तु वैदिक मान्यता को जानने पर इसमें सवाल आया की अल्लाह ने कलम बनाई तो किस चीज से बनाई कलम बनाने का उपकरण क्या था ?{जिसने कलमके ज़रिये से तालीम दी} 96/8 में कहा गया |
الَّذِي عَلَّمَ بِالْقَلَمِ [٩٦:٤]
इसका समाधान इस्लाम के पास नहीं है और न यह कभी दे सकते हैं इसका समाधान | कारण इस्लाम में सवाल नहीं कर सकते और न पूछा जा सकता है, की कलम किस चीज से बनी ? बनाने वाला कौन था वह लकड़ी कहाँ से मिली कि जिससे कलम बनाई गई, जिस लकड़ी को काटकर कलम बनाया गया वह छुरी अथवा छुरी जैसा कोई उपकरण कहाँ से आल्लाह पा गये ? यह सब सवालों के घेरे में है | इस लिए कहा गया रसूल ने जो बताया अल्लाह की तरफ से उसे बगैर जाँच पड़ताल किये मानना है कोई सवाल किया जाना ईमान से खाली होना है |
अब सवाल यही आया की अल्लाह की कलम उसमें काली रौशनाई या फिर रिफिल अल्लाह को कहाँ से और किस्से मिली ? जब अल्लाह को निराकार बोला तो लिखा कौन ? कलम के जरिये से तालीम दी तो जरुर लिख कर ही दिया होगा लिखा किस पर कागज या कागज जैसे उपकरण क्या था जिसपर लिखा गया ? यह सभी सवाल वैदिक मान्यता के आधार पर ही सामने प्रस्तुत हो पाया |
लिखने के लिए तीन चीज चाहिए जैसा लिखने वाला – जिसके द्वारा लिखा गया,या जिसके सहारे से लिखा गया –और जिस के लिए लिखा गया हो |
किसी भी चीज को बनाने के लिए तीन चीज की जरूरत होती है उसके बगैर किसी भी चीज का बनाया जाना संभव कहाँ ? यही शिक्षा वैदिक ज्ञान से प्राप्त हुवा जो इस्लाम में नहीं मिला था | इस्लाम की पढाई में और इमामत करने के काल में भी यही मानता रहा मन में कभी यह सवाल ही नहीं आया और न इसपर कभी सवाल उठ सकता है यह भी नहीं सोचा |
वैदिक मान्यता और वैदिक सिद्धांत ने हमें यह ज्ञान कराया | यही कारण बना की मैं वेद और कुरान की समीक्षा लिख कर दुनिया वालों को सत्य असत्य बताने का प्रयास कर रहा हूँ | हम मानव होने के कारण मानवता का आधार क्या है उसे जानना जरूरी है |
कुरान की जो तालीम मैंने पाई या जो इस्लामिक शिक्षा को मैंने हासिल किया, उसमें यही तो पाया ईमान के दायरे में, की इसमें बताई गई या लिखी गई बातों पर आप सवाल नहीं कर सकते| वैदिक मान्यता ने हमें यह बताया |
{यसतर्केणअनुसंद्ध्त्ते} अर्थात बात को तर्क के कसौटी पर विचार कर जो सत्य हो उसे मानें जो खरा न उतरे उसे मानने की जरूरत नहीं | इस प्रकार अल्लाह और ईश्वर में भेद है तथा वेद और कुरान में भी भेद है जो सामने है | महेन्द्र पाल आर्य