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हमारे देश में अपुज्यों की पूजा और पूजनीय लोग तिरस्कृत होते रहे हैं ||

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फेस बुक में किसी ने लिखा ||
की गोरों के साथ एक कालेज में साथ साथ पढ़ सकते हैं, एक ही होस्ट्ल में रह सकते हैं, एक ही मेस में खाना खा सकते हैं | तो एक ट्रेन में सफ़र क्यों नहीं कर सकते ?
यह घटना थी मोहोंन दास करम चन्द गाँधी की, के गाँधी को ट्रेन से उतार दिया था गोरे अगरेज |
पर दुरभाग्य यह है की गाँधी ने इसका विरोध नहीं किया और न कोई आन्दोलन | गाँधी को जहां विरोध करना था उसका विरोध नहीं किया | और भारत आकर तुर्की के कमाल पाशा के आन्दोलन को भारत वासियों पर खिलाफत आन्दोलन का बोझ बना दिया |
 
जब की भारत के साथ या भारत वासियों के साथ इसका कोई संपर्क ही नहीं था | और इस आन्दोलन में भारत में हिन्दू मुसलिम में भेद पैदा हुवा |
जिन अंग्रेजों के खिलाफ गाँधी को आन्दोलन करना था आवाज उठानी थी वहां तो चुपचाप ट्रेन से उतर गये भारत आकर स्वतंत्रता आन्दोलन किया |
 
इससे यह प्रमाणित हो गया की गाँधी जी कितने दिल के कमजोर थे मौके पर जो बात करनी थे उसे नहीं कर पायें और उससे बाहर आकर आन्दोलन किया |
 
और भारत में जो दिलके मजबूत थे भारत में ही अंग्रेज प्रिंसिपल मिस्टर ओटन `के गाल में थप्पड़ मारे थे वह व्यक्ति दिलके कितने मजबूत थे, इससे पता लगता है |
परन्तु यह गाँधी दिलके कमजोर ने ऐसे दिलके मजबूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सहन नहीं किया | क्या यह देश का दुर्भाग्य नहीं की भारत के लोग ऐसे दिल के कमजोर की पूजा कर रहे हैं ?
 
जिनकी पूजा होना चाहिए उन्हें तिरस्कृत किया और जो पूजनीय नहीं उनकी पूजा करना शास्त्र में भी मना किया है | और बताया की जहां अ पूज्यों की पूजा होती हैं और पूजनीय जहाँ तिरस्कृत होते हैं | वहाँ अकाल, मृत्यु , और भय, यह तीनों लगा राहेगा | यह है सत्यता || महेन्द्र पाल आर्य =13 /4 /2022

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