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|| राम नवमी,अर्थात राम का जन्म दिवस ||

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|| राम नवमी,अर्थात राम का जन्म दिवस ||
सम्पूर्ण धरती पर सभी मानव कहलाने वालों को यह जानकारी है की राजा दशरत जी के घर जेष्ठ संतान के रूपमें जन्म लेने वाले का नामकरण हुवा श्री राम के नाम से |
इन्हीं मर्यादा श्रीराम जी के जन्म दिन को दुनिया वाले रामनवमी के रूपमें विश्वभर मानाते हैं | श्रीराम मात्र एक नाम ही नहीं बल्कि गुणवांण व ऐशार्य शाली का नाम है, जिन्हें लोग राम नवमी के नाम से जानते हैं या मनाते हैं | बहुत लोग ऐसे भी हैं जो 9 दिन तक उनके नाम से उपवास भी रहते है, और अनेक साधनाएं भी करते हैं | अनेकों की मान्यता है की यही श्री राम परमात्मा हैं, यह मानव कहलाने वालों की बहुत बड़ी भूल है जो लोग मर्यादा पुरषोत्तम कह कर भी उन्हें ईश्वर मानते हैं | एक तरफ तो श्रीराम जी का जन्म दिन भी मना रहे हैं और उन्हीं राम को ईश्वर भी मान रहे हैं,फिर इन्हीं श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम भी कह रहे हैं |
अर्थात जो पुरुषों में मर्यदित है उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है.एक पुरुष मानने के बाद भी उन्हीं श्रीराम को ईश्वर मानना यह कितनी पागलपन की बात है.और यह जानने का भी प्रयास नहीं किया की ईश्वर अजन्मा है |
विशेष कर यह हिन्दू कहलाने वाले ही ना तो श्रीराम जी को ठीक ठीक जान पाए और नाही ईश्वर को जान सके | करण ईश्वर अजन्मा है, जिन राम को ईश्वर मानते हैं उन्हीका जन्म दिन मना रहे हैं, कितनी अज्ञानता की बात हैं जब राम जन्म ले रहे हैं किसी माता पिता के घर और इन्हें ईश्वर माना, तो क्या श्रीराम जी जन्म लेने के बाद अपने माता पिता को माँ बाप कहते व या मानते थे या नहीं ? अगर राम जी ने दशरथ को पिता कहा फिर राम जी ईश्वर कैसे ?
इधर ईश्वर का कोई पिता नहीं है सब ईश्वर के पुत्र कहलाते हैं और ईश्वर पालनहार होने से वह पिता है | जब ईश्वर ही पिता होते हैं, और राम को ईश्वर मानने वाले यह विचार करें की राम जी के पिता तो दशरथ ही हैं फिर राम जी ईश्वर कैसे होंगे ? ईश्वेर को माता पिता बंधू सखा कहा जाता है जिसमें माता और पिता के भी गुण हैं | तो राम में माता का रूप मानना सम्भव ही नहीं और न उचित है, यह सभी प्रमाण मिलने के बाद भी अगर कोई मानव कहलाने वाला श्रीराम जी को ईश्वर कहे या माने मेरे विचार से वह स्वस्थ दिमाग वाले नहीं हो सकते |
महेंद्र पाल आर्य 22,4.21

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